उरई। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगजीवन राम दो महीने की ट्रेनिंग पर गए हैं। उनके स्थान पर वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ अनिल राज के पास कार्यभार है। पहले दिन उन्होंने वार्डों का निरीक्षण कर मरीजों से मुलाकात की। वार्ड में मरीजों की जांच के लिए चेस्ट फिजीशियन डॉ. शिवेश वर्मा को बुलाया पर वह नहीं आए। इस पर नाराजगी जताते हुए डॉ. शिवेश को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
उन्होंने ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अरविंद श्रीवास्तव के ओपीडी में बैठकर मरीज देखने पर पाबंदी लगाते हुए उन्हें ब्लड बैंक में ही बैठकर काम करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने चिकित्सीय स्टाफ के साथ सीएमएस कार्यालय में बैठक भी की। सभी को निर्देशित किया कि समय से ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज करें। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
कहा कि मरीजों को जबरन बाहर की दवाएं लिखने वाले चिकित्सकों पर भी नकेल कसी जाएगी। उन्होंने कहा कि चाहे वार्ड ड्यूटी हो या इमरजेंसी ड्यूटी सभी को करनी होगी। ड्यूटी में कोताही बरतने वालों पर सख्ती होगी। उन्होंने तृतीय श्रेणी, चतुर्थ श्रेणी, संविदा, आउट सोर्सिंग स्टाफ को भी समय से आने की हिदायत दी। कहा कि एनएचएम का जो भी स्टाफ फील्ड ड्यूटी पर जाएगा, उसकी जानकारी मूवमेंट रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। बिना मूवमेंट रजिस्टर के जानकारी दिए फील्ड में जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस दौरान डॉ. अविनेश कुमार बनौधा, डॉ. विनय अग्रवाल, टीपी गौतम, जंग बहादुर सिंह, राहुल अग्निहोत्री आदि मौजूद रहे।
इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया
उरई। शहर के मोहल्ला नया पटेलनगर निवासी शकील ने डीएम को शिकायती पत्र दिया। बताया कि वह पुत्रवधू नाजनी की डिलीवरी कराने के लिए 20 मई को महिला अस्पताल लाए थे। नर्सों ने बताया कि पेट में बच्चा मर गया। 22 मई को आपरेशन के बाद बहू को डिस्चार्ज कराकर ले गए। दो दिन बाद दर्द होने पर प्राइवेट अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने बताया कि पेट के अंदर कनारी (प्लेसेंटा) छोड़ दी गई है। इसकी वजह से उसे दोबारा आपरेशन कराना पड़ा। उसने जांच कर कार्रवाई की मांग की। (संवाद)