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Jalaun News: काली मिट्टी बनी बाधा, चार कस्तूरबा विद्यालयों के भवन निर्माण में देरी

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फोटो-20-मड़ोरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय। संवाद
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उरई (जालौन)। जिले के चार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए भवन एवं हॉस्टल निर्माण के लिए बजट जारी कर दिया गया है लेकिन निर्माण स्थलों पर काली मिट्टी निकलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने शासन को अवगत कराते हुए अतिरिक्त बजट की मांग की है। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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जिले के कस्तूरबा विद्यालय उच्चीकृत किए गए है। यहां अभी तक कक्षा आठ तक की बालिकाओं को पढ़ाया जाता था लेकिन अब नौ से 12वीं की बालिकाओं को पढ़ाने की तैयारी है। इन विद्यालयों के नजदीक जहां इंटर कॉलेज है वहां बालिकाओं को शिक्षा दी जा रही है लेकिन जहां इंटर कॉलेज नहीं है वहां आवासीय भवन बनाए जा रहे है। डकोर ब्लॉक का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बीआरसी मड़ोरा परिसर में संचालित हो रहा है। इसके स्थायी भवन के लिए धरगुवा गांव में भूमि चिह्नित कर ली गई है। इसी तरह जालौन ब्लॉक का कस्तूरबा विद्यालय गूढ़ा में चल रहा है। इसके लिए धनौरा गांव में शैक्षणिक भवन एवं हॉस्टल निर्माण के लिए स्थान तय है।
वहीं महेबा ब्लॉक का कस्तूरबा विद्यालय वर्तमान में चुर्खी में संचालित है। इसके लिए शैक्षणिक भवन और छात्रावास के लिए भूमि चयनित की गई है। रामपुरा ब्लॉक का कस्तूरबा विद्यालय टीहर गांव में चल रहा है। टीहर में पहले से शैक्षणिक भवन मौजूद है लेकिन छात्रावास न होने के कारण अब हॉस्टल निर्माण की योजना बनाई गई है। निर्माण कार्य के लिए प्रति विद्यालय करीब 4.18 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वहीं केवल हॉस्टल निर्माण के लिए 1.78 करोड़ रुपये का बजट तय है। सभी परियोजनाओं के लिए कार्यदाई संस्था को नामित कर दिया गया है।
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जिला समन्वयक बालिका शिक्षा अजात शत्रु राजपूत ने बताया कि जिन स्थानों पर नए भवन और हॉस्टल बनने हैं वहां काली मिट्टी निकल आई है। इस मिट्टी को हटाकर सुरक्षित नींव तैयार करने के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है। इसी कारण निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रुका हुआ है। कार्यदाई संस्था की ओर से अतिरिक्त बजट की मांग भेज दी गई है। बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
कैसी होती है काली कपासी मिट्टी
गहरे काले रंग की चिकनी मिट्टी है जो नमी सोखकर फूल जाती है और सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। यह लावा चट्टानों के टूटने से बनती है और कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त होती है इसलिए इसे यह नाम मिला है।


अभी आठ स्थानों पर चल रहे कस्तूरबा विद्यालय
डकोर ब्लॉक का कस्तूरबा विद्यालय बीआरसी मड़ोरा में, कोंच नगर का कोंच में, कदौरा का छौंक में, जालौन ब्लाॅक का गूढ़ा में, महेबा ब्लॉक का चुर्खी में, नदीगांव ब्लॉक का बंगरा में, रामपुरा ब्लॉक का टीहर में कस्तूरबा विद्यालय चल रहा है। माधौगढ़ और कुठौंद ब्लॉक में कस्तूरबा विद्यालय नहीं है। यह विद्यालय बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए खोले गए हैं।
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