उरई (जालौन)। जिले की तीनाें सीटाें पर कमल खिलने के बाद भाजपा का सालों से चला आ रहा वनवास भी खत्म हो गया। अरसे बाद मिली सफलता पर भाजपाई गदगद दिखाई दे रहे हैं। कभी बसपा का गढ़ माने जाने वाले जिले में पहली बार मतदाताओं ने अन्य दलाें का क्लीन स्वीप कर दिया। उरई जालौन व कालपी विधानसभा में 15 साल बाद कमल खिला तो वहीं माधौगढ़ में 19 साल बाद भाजपा का परचम फहराया है। इससे पहले यह करिश्मा बीएसपी ने वर्ष 1993 मेें किया था। जब माधौगढ़, उरई व कालपी सीट पर अपना परचम फहराया था। पार्टी की शानदार जीत पर भाजपा सांसद भानू प्रताप वर्मा, शीतल सिंह सेंगर, जिलाध्यक्ष उद्यन पालीवाल, अरविंद चौहान, रामू निरंजन, नगर उपाध्यक्ष आदित्य अग्रवाल, नागेंद्र गुप्ता आदि ने मतदाताओं को बधाई दी है।
उरई जालौन विधानसभा सीट पर वर्ष 2002 में भाजपा के चाणक्य मानें जाने वाले बाबू राम एमकाम ने बसपा के अकबर अली को पराजित कर भगवा परचम फहराया था। वह सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे। इसके बाद भाजपा का कोई भी प्रत्याशी जीत का परचम नहीं लहरा सका। 2007 में कांग्रेस के विनोद चतुर्वेदी ने जीत हासिल की थी। इसके बाद इस सीट पर परिसीमन के बाद आरक्षित सीट कर दी थी। वर्ष 2012 में सपा प्रत्याशी दयाशंकर वर्मा ने जिले में पहली बार सपा का खाता खोला था और उन्हाेंने बसपा के श्रीपाल को हराया था। इस बार चुनाव में भाजपा के गौरीशंकर वर्मा 15 साल बाद चुनाव में जीत हासिल की।
कालपी विधानसभा क्षेत्र तो बसपा का गढ़ माना जाता रहा है। यहां पर बसपा के श्रीरामपाल ने लगातार तीन बार 1991, 93 व 96 में जीत की हैट्रिक लगाकर कैबिनेट मंत्री बने थे। इस सीट पर भाजपा के अरुण महरोत्रा ने 2002 चुनाव जीते थे। इसके बाद 2007 में बसपा के छोटे सिंह व 2012 में कांग्रेस की उमाकांती ने जीत हासिल की थी। इस सीट पर भी 15 साल बाद भाजपा के नरेंद्र जादौन ने जीत हासिल की है। वहीं माधौगढ़ विधानसभा सीट पर भाजपा को 20 साल तक जीत का इंतजार करना पड़ा। इस सीट पर आखिरी बार 1996 में भाजपा के संतराम सेंगर चुनाव जीते थे। इसके बाद पार्टी लगातार हार का मुंह देख रही थी। वर्ष 1991 में भाजपा के केशव सिंह सेंगर चुनाव जीते थे। इसके बाद बसपा के शिवराम कुशवाहा ने चुनाव जीता था। वर्ष 2002 में बसपा के ही ब्रजेंद्र सिंह चुनाव जीते थे और वह मंत्री बने थे। वर्ष 2007 में बसपा के हरिओम उपाध्याय ने चुनाव जीता और वह मंत्री बने। इसके बाद इसी सीट पर बसपा के संतराम कुशवाहा ने जीत का परचम फहराया था। अब ऐसे में भाजपा को काफी अंतराल के बाद तीनाें सीटें हाथ आई है। देखना यह होगा की वनवास के बाद लौटी भाजपा जिले में कितना विकास कराएगी। बुंदेलखंड के जालौन जिला किसानी पर आधारित है और यहां पर दैवीय आपदा से किसान परेशान है और वह आत्महत्या तक कर लेता है। भाजपा पर अब जवाबदेही होगी कि क्या वह सिंचाई, दवाई और पढ़ाई के दावे पर खरी उतरेगी और किसानाें का कर्ज माफ भी अह्म मुद्दा रहेगा।