उरई। आधी आबादी को मजबूत करने के लिए भले ही सभी राजनीतिक दलों का प्रयास रहता हो। पर जिले की राजनीति में आज भी इनका प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ा है। इस बार तीनों विधानसभा क्षेत्रों के 40 में से सिर्फ छह महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। जिसमें दो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमा रही हैं।
इस बार तीनों विधानसभा क्षेत्रों से 12,78,538 मतदाता हैं जो 40 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। इनमें से 5,89,521 महिला मतदाताओं की भागीदारी है। हर बार निर्णायक की भूमिका में महिलाओं का भी विशेष योगदान है। पर प्रतिनिधित्व करने में आज भी महिलाएं पीछे हैं। बड़े-बड़े राजनीतिक दलों की ओर से महिलाओं को सशक्त करने के दावे खोखले हैं। कांग्रेस ने इस बार महिलाओं को साधने के लिए उरई सदर सीट से उर्मिला खाबरी तो कालपी सीट से एक बार विधायक रह चुकीं उमा कांति को टिकट दिया है। उधर, बसपा ने भी माधौगढ़ से शीतल कुशवाहा को टिकट देकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया है। इधर, पहली बार प्रदेश में चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने भी उरई सदर सीट से दीपशिखा को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस रण में कालपी से अंजना और उरई सदर से प्रेमलता वर्मा ने निर्दलीय ताल ठोंककर महिलाओं की दावेदारी बढ़ाने का काम किया है।
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वर्ष 2017 में सिर्फ एक महिला को मिला था मौका
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में चार मुख्य राजनीतिक दलों में से सिर्फ कांग्रेस-सपा गठबंधन ने कालपी से उमा कांति सिंह को टिकट दिया था। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा किसी अन्य बड़े दल ने महिला प्रत्याशी नहीं उतारी थी। इससे पहले 2012 में भी उमा कांति ने कांग्रेस प्रत्याशी बन कालपी से बड़ी जीत दर्ज की थी।
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तीनों विधानसभा से कुल प्रत्याशी - 40
उरई सदर से प्रत्याशी - 13
कालपी से प्रत्याशी - 14
माधौगढ़ से प्रत्याशी - 13
तीनों विस से महिला प्रत्याशी - 6