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एक साथ उठीं चचेरे भाइयों की अर्थियां, हर आंख नम

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लोकेंद्र की फाइल फोटो - फोटो : ORAI
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आटा (जालौन)। इटौरा मार्ग पर शुक्रवार देर रात अनियंत्रित कार के पुलिया से टकराने पर दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई थी। जैसे ही दोनों की मौत की खबर परिजनों के पास पहुंची तो धनतेरस व दीवाली की खुशियां मातम में बदल गईं। हादसे ने दोनों की जिंदगी के दीये हमेशा के लए बुझा दिए। दीपक के माता पिता को गुजरात से आना था लेकिन जब तक वे नहीं आ गए तब न तो दीपक की ही अर्थी उठी और न ही लोकेंद्र की। उनके आने पर दोनों की अर्थियां एक साथ अंतिम संस्कार के लिए ले जाई गईं। उस वक्त हर एक की आंखें आंसुओं से नम थी।
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गुरु का इटौरा गांव निवासी दीपक (33) बांदा के अतर्रा स्थित इंटर कालेज में शिक्षक के पद पर कार्यरत था और उसका चचेरा भाई लोकेंद्र (22) आटा में ही वेल्डिंग का काम करता था। शुक्रवार की देर रात दोनों कार से कालपी गए थे वहां से लौटते वक्त दीपक की कार अनियंत्रित होकर इटौरा मार्ग स्थित पुलिया से टकरा गई थी। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां दीपक और उसके चचेरे भाई लोकेंद्र को मृत घोषित कर दिया गया। दोनों ही चचेरे भाइयों के घर गांव गुरु का इटौरा में आमने-सामने स्थित है।
जैसे ही परिवार को हादसे की जानकारी हुई तो दोनों परिवारों के साथ ही गांव में कोहराम मच गया। हर कोई अस्पताल की ओर भी भाग रहा था। दीपक के पिता लालता प्रसाद अपनी पत्नी के साथ बड़े बेटे आनंद के घर गुजरात गए थे। आनंद गुजरात में इंजीनियर है और अपने परिवार व दिव्यांग भाई विकास के साथ रहता है। परिजनों ने बताया कि दीपक की शादी चार साल पूर्व ही मौदहा की अर्चना से हुई थी। फिलहाल अर्चना व दीपक के कोई संतान नहीं थी। अर्चना गांव में बुजुर्ग दादी की देखभाल के लिए कुछ दिन पहले ही आ गई थी।
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जबकि दीपक दीवाली की छुट्टी होने पर शुक्रवार को घर आ रहा था। दीपक ने ही लोकेंद्र को फोन कर पहले काशीखेड़ा बुलाया फिर वहां से दोनों कालपी गए और इसके बाद वे घर के लिए इटौरा लौट रहे थे, तभी रास्ते में हादसे में दोनों की मौत हो गई। दीपक की पत्नी अर्चना तो बदहवास सी हो गई थी। लोकेंद्र आटा में वेल्डिंग का काम करता था और रिश्ते में दीपक का चचेरा भाई लगने के साथ साथ उसका अच्छा दोस्त भी था। लोकेंद्र की शादी नहीं हुई थी। उसके दो भाई राहुल व युगेंद्र प्रताप भी है। लोकेंद्र की मां श्यामवती का भी रो रोकर बुरा हाल है। वहीं पुलिस का कहना है कि पुलिया के पास मोड़ काफी खतरनाक है, वहां पहले भी कई सड़क हादसे हो चुके हैं।
मौत बनी पांच माह पूर्व खरीदी गई कार
दीपक के घरवालों ने बताया कि अभी चार महीने पहले ही उसने नई कार खरीदी थी। किसी को क्या पता था कि वही कार एक दिन उसकी मौत का कारण भी बन जाएगी। हर कोई थाने में खड़ी कार को ही हादसे के लिए कोस रहा था।
दोनों के पिता रह चुके पूर्व प्रधान
दीपक और लोकेंद्र ही नहीं उनके पिता भी आपस में गहरे दोस्त थे, जिससे उनका पारिवारिक रिश्ता और भी मजबूत हो गया था। ग्रामीणों ने बताया कि दीपक के पिता लालता और लोकेंद्र के पिता रामबाबू दोनों ही गांव के पूर्व प्रधान भी रह चुके हैं।

घर पर रोते बिलखते लोकेंद्र के परिजन- फोटो : ORAI

दीपक की फाइल फोटो- फोटो : ORAI

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