जालौन। यूक्रेन से लौटी छाया यादव को देखकर पूरे परिवार के आंखें खुशी से छलक आईं। मां ने बेटी की आरती उतारकर सीने से लगाया और पास बैठाकर दादी काफी देर तक निहारती रहीं फिर प्यार से दुलराया।
जालौन के मोहल्ला रापटगंज निवासी राघेंद्र यादव की छोटी बहन छाया यूक्रेन के विनीस्थिया शहर में एमबीबीएस करने गई थी। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद छाया वहां फंस गई थीं। इससे परिवार के लोग परेशान थे। तीन दिन के संकट भरे सफर के बाद सोमवार रात 8:30 बजे वह घर पहुंची। दरवाजे पर पहुंचते ही मां पुष्पा यादव और दादी पार्वती यादव लिपटकर रोने लगीं।
मां ने बेटी की आरती उतारी और फूल माला पहनाकर स्वागत किया। भाई राघवेंद्र और बहन संध्या की आंखें भी छलक गईं। चाचा हरपाल यादव, चाची वंदना और भाभी अनुपम ने भी खुशी का इजहार किया। जानकारी होते रिश्तेदार और मोहल्ले के लोगों ने भी घर पहुंचकर हाल जाना।
सायरन बजते ही बंकर में छिप जाती थी
छाया ने बतया कि दो दिन हम लोग दहशत के साये में हास्टल में रहे। सायरन बजते ही हमें बंकरों में छिपने जाना पड़ता था। हर 15-20 मिनट में सायरन बजता था। हास्टल में बंकर नहीं था। सड़क पार करते हुए विश्वविद्यालय के बंकर में छिपने जाते थे। जब तक वहां से हास्टल में लौटते थे तब तक फिर सायरन बज जाता था। उन्होंने बताया कि सबसे बुरे हालात कीव और खारकी शहर के हैं। दोनों शहरों में रूसी सेना घुस चुकी है। छात्र-छात्राएं भूखे-प्यासे कई दिनों से बंकरों में छिपे हुए हैं।
19 घंटे में रोमानिया बॉर्डर पार कर सकीं सृष्टि
उरई। जिला महिला अस्पताल में तैनात डॉ. एके सिंह की बेटी सृष्टि भी शनिवार को देर शाम रोमानिया बॉर्डर के लिए निकलीं थीं। उन्हें भी करीब 12 घंटे के सफर के बाद बस ने करीब सात से आठ किलोमीटर पहले छोड़ दिया। रविवार दोपहर एक बजे से रोमानिया बॉर्डर पर कतार में लगे-लगे वह सोमवार सुबह आठ बजे रोमानिया बॉर्डर पार कर सकी। बार्डर पार करने वाले बच्चों की संख्या अधिक होने की वजह से रोमानिया की राजाधी बुखारेस्ट स्थित हवाई अड्डे तक पहुंचाने वाली बसों की संख्या कम पड़ रही है। इसके चलते उन्हें बॉर्डर के पास ही एक भारत सरकार के शेल्टर रूम में रुकवाया गया है। उनके बुधवार तक घर पहुंचने की उम्मीद है।