उरई। ग्राम पंचायत अधिकारी-ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति ने शुक्रवार को विकास भवन परिसर में धरना दिया। पंचायत सचिवों के साथ कई गांवों के प्रधानों ने भी धरना में हिस्सा लिया। प्रधान व सचिवों ने आरोप लगाया कि गोशाला संचालन में दबाव बनाकर उत्पीड़न किया जा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समिति के जिलाध्यक्ष पवन तिवारी ने कहा कि विकासखंडों में संचालित गोशालाओं में भूसा, दाना, चोकर आदि की सामग्री खरीद के लिए फर्म को टेंडर दिए गए हैं, लेकिन फर्म डिमांड लगाने के बावजूद सामग्री की आपूर्ति नहीं कर रही है। जबकि उच्च अधिकारियों द्वारा सचिवों को 15 दिन का स्टॉक रखने का दबाव बनाया जा रहा है। निरीक्षण के नाम पर अच्छाइयों को नजरअंदाज कर छोटी-छोटी कमियों पर पंचायत सचिवों का वेतन रोकने, निलंबन जैसी कार्रवाई की जा रही हैं। चार सचिवों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। मनरेगा के भुगतान में मनमानी हो रही है। कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है।
धरने पर बैठे सचिव व प्रधान सीडीओ को मौके पर बुलाने पर अड़े रहे। करीब दो घंटे बाद सीडीओ केके सिंह मौके पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि जो उनकी जो भी मांगें हैं, उन पर विचार कर निराकरण कराया जाएगा।
इस दौरान रामबिहारी वर्मा, अभिनव पाठक, रोहित कुशवाहा, अश्विनी गुबरेले, राममोहन, पुष्पेंद्र, अंकित निरंजन, निधि राठौर, साधना राठौर, नीता, मंजू दिवाकर व प्रधान केके राजपूत, ओमकार पाल, धर्मेंद्र कुशवाहा, बांके बिहारी, जुझार सिंह आदि रहे।