उरई। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को काउंटर पर पर्याप्त दवाएं नहीं मिल रही हैं। हर पर्चे में एक-दो दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों का कहना है कि मुफ्त इलाज के लिए यहां आते हैं, लेकिन यहां तो प्राइवेट जैसा हाल है। तीन घंटे तक इंतजार करने के बाद जब काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां दवाएं नहीं मिलती है, मजबूरी में बाहर से खरीदनी पड़ रही है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि उनके पास सभी दवाएं उपलब्ध हैं।
कालपी रोड स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब दो हजार मरीज अपना इलाज करवाने पहुंचते हैं। मरीज घर से सोचकर आते हैं कि एक रुपये का पर्चा बनवाकर वह इलाज करवा लेंगे और घर चले जाएंगे, लेकिन डॉक्टर को दिखवाने के बाद जब वह दवा काउंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें पर्याप्त दवाएं नहीं मिलती हैं। हालत यह है कि पांच दवाओं में दो से तीन दवाएं नहीं मिल रहीं हैं।
राजेंद्र नगर निवासी शिवपाल ने बताया कि वह मेडिकल कॉलेज में पत्नी को पेट संबंधी समस्या होने पर दिखवाने आए थे, यहां वह नौ बजे पहुंच गए और करीब एक घंटे बाद उनका पर्चा बन पाया। इसके बाद डॉक्टर के पास पहुंचे तो वहां भी लाइन लगानी पड़ी है। तीन घंटे बाद जब वह लाइन में लगकर पहुंचे तो पांच दवाओं में दो नहीं मिलीं। इससे उन्हें मजबूरी में बाहर की दवाएं खरीदनी पड़ेगी।
दो दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ेगी
दादी को समस्या होने पर वह उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज आए थे। काउंटर पर पहुंचे तो दो दवाएं नहीं मिली हैं। उन्हें बाहर से लेना पड़ रहा है। जनऔषधि केंद्र पर भी गए थे, लेकिन वहां भी यह दवाएं नहीं मिली हैं।
- संतोष, कालपी
बेटी अमायरा के बीमार होने पर उसे लेकर मेडिकल कॉलेज आए थे। डॉक्टर ने बेटी को देखने के बाद चार दवाएं लिखीं, लेकिन अंदर केवल दो मिली हैं। मजबूरी में बाहर से दवाएं लेनी पड़ेगी। वह कर भी क्या सकते हैं। - राहुल, आटा
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में करीब 300 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। सभी को दवाएं दी भी जा रहीं हैं। अगर दवा नहीं मिल रही है, तो मरीज उन्हें बता सकते हैं।
डॉ. अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज