उरई (जालौन)। रघुवीरधाम गेस्ट हाउस मेें चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पुरुषोत्तम शरण शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को किसी से डर कर उसका सम्मान नहीं करना चाहिए। जब कृष्ण को पता चला कि इंद्र के भय से ग्रामवासी उनकी पूजा करने के लिये घरों से पकवान बनवाकर यमुना नदी के किनारे एकत्र हो रहे हैं तो उन्होंने सभी को इंद्र की पूजा करने से मना कर दिया। गांववालों के आशंका जताने पर भगवान ने उनको भरोसा दिया कि इंद्र तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएंगे।
शास्त्री जी ने बताया कि कृष्ण के कहने पर सभी ने विधि विधान से गोवर्धन पर्वत की पूजा की। यह देख इंद्र ने कुपित होकर बादलों को आदेश दिया कि इतनी वर्षा करो कि सारा गोकुल बह जाए। कृष्ण ने देखा कि तेज वर्षा से गोकुलवासी डर रहे हैं तो उन्होंने अपनी तर्जनी पर गोवर्धन पर्वत उठाकर उसके नीचे सभी गोकुल वासियों को खड़ा कर लिया। इस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड चूर कर दिया।
इसके पहले शास्त्री जी ने भगवान कृष्ण की काली मर्दन, चीरहरण व रासलीला का विस्तार से वर्णन किया। कथा के विश्राम पर परीक्षित राजेंद्र नीखरा, श्रीमती कमला नीखरा ने श्रीमद्भागवत पुराण की आरती करके छप्पन व्यजंनों का भोग लगाया तथा श्रोताओं को प्रसाद बांटा।