वित्तीय वर्ष 2015-16 में दवाओं के लिए भेजे गए बजट का डेढ़ प्रतिशत भी मेडिकल कालेज को नहीं मिला है। ऐसे में कालेज को दवा कंपनियों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो कालेज प्रबंधन पर इस वक्त दवा कंपनियों का 22 लाख का कर्ज है। कर्ज बढ़ने का कारण कंपनियों ने मेडिकल कालेज को और दवाएं देने से मना कर दिया है।
उरई मेडिकल कालेज में रोजाना करीब चार से पांच हजार लोग दूर-दूर से अपना इलाज कराने आते हैं। कालेज प्रशासन की ओर से शासन को दवाओं के मद में करीब दो करोड़ का बजट बनाकर इस वर्ष मार्च माह में भेज दिया गया था। नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने के छह महीने बीतने के बाद भी आज तक बजट के नाम पर महज तीन लाख रुपये भेजे गए।
कालेज प्रशासन ने पहले तो शासन से बजट जल्द निर्गत करने की अपील की, पर इसमें हो रही देरी के बाद गरीब मरीजों में दवाओं के वितरण को चालू रखने के लिए निजी दवा कंपनियों से दवाएं उधार लेना शुरू कर दिया। कालेज पर इस वक्त करीब 22 लाख की दवाओं का उधार हो गया है।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सुरेश चंद्र ने माना कि अब तक बजट नहीं आया है, लेकिन दवा कंपनियों से 22 लाख का उधार लेने के सवाल को वे टाल गए। कहा कि अस्पताल में गरीब मरीज आते हैं, हमारा प्रयास है कि उन्हें किसी भी तरह की तकलीफ न हो।
शासन से बजट के लिए बातचीत चल रही है। उम्मीद है पैसा जल्द मिल जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अस्पताल में किसी भी हालत में दवाओं की कमी नहीं होने दी जाएगी।