जालौन। ईश्वर से प्रेम करने वाले भक्तों को भगवान बिन मांगे ही वह सब कुछ दे देता है, जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता। तुम भगवान के भक्त बनकर देखो तो वह सदैव तुम्हारे लिए तत्पर रहेंगे। यह प्रवचन ग्राम दौलतपुरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भागवताचार्य अतुलेशानंदजी महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि प्रभु राम की संगति में पशु भी अपना पशुवत व्यवहार छोड़ देता है, वहीं रावण की संगति में मानव भी पशुवत व्यवहार अपना लेता है। राम-रावण, कृष्ण-कंस तथा द्रोपदी-दुर्योधन की राशि एक होने के बाद भी उनके कर्म अलग-अलग होने से उनके चरित्रों में काफी असमानताएं रहीं। व्यक्ति जैसे कर्म करता है, वैसा ही फल उसे प्राप्त होता है।
इसलिए व्यक्ति को हमेशा ही सद्कर्मों को करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। कथा व्यास ने उद्धव गोपी संवाद, कृष्ण रुक्मिणी विवाह का वृत्तांत भी भागवत प्रेमियों को सुनाया। कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालुओं में भागवत कथा के परीक्षित फूलारानी, ख्यालीदास महाराज हंस, अमित, शैलेंद्र, नीरज शास्त्री, कामिनी, दयाशंकर, निखिल, विपिन, कमलेश, काजोल, दीनदयाल, बालाराम, बृजकिशोर, दिग्विजय, लक्ष्मीकांत, रमाकांत, जितेंद्र, रविंद्र, अरविंद, मानवेंद्र, शैलेंद्र, अनुज, छोटू, गोलू आदि भक्तों ने भागवत कथा को सुनकर अच्छे कर्मों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा ली।