उरई। पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड कार्यालय की कई सड़कें कागजों में तो ठीक हैं, लेकिन हकीकत में इन पर चलना जोखिम भरा है।
पिछले वित्तीय वर्ष में विभागीय अधिकारियों ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के नाम पर एक करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन मौके पर अभी भी दर्जनों सड़कें खस्ताहाल हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारी ठेकेदारों की मिलीभगत से दो चार गड्ढों को भरकर सड़क को सही दिखा देते हैं और जिम्मेदार उनका भुगतान कर सरकारी धन का बंदरबांट कर देते हैं। इससे हर साल यह सड़कें गड्ढा मुक्त होती रहती हैं।
जिले में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी कई सड़कें अभी तक गड्ढा मुक्त नहीं हो पाई हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की बात करें तो मुख्यमंत्री ने दिसंबर तक सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की बात कही थी, लेकिन जिम्मेदार नहीं कर पाए थे। इसके बाद इसकी तारीख को बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया था। इस दौरान पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड के अधिकारियों ने अपने क्षेत्र कोंच, डकोर व नदीगांव में 118 किलोमीटर को गड्ढा मुक्त होना बताया। इस पर विभागीय अधिकारियों ने करीब एक करोड़ का भारी भरकम बजट भी खर्च किया, लेकिन हकीकत यह है कि अभी भी दर्जनों सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। उन पर चलना जोखिम भरा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई सड़कों में अधिकारियों ने दो चार गड्ढों को भरवा दिया और कागजों में उसको एकदम फिट दिखा दिया, लेकिन हकीकत में उस पर चलना मौत को दावत देने जैसा है।
केस - एक
जुझारपुरा से हिंगुटा जाने वाली तीन किलोमीटर सड़क गड्ढों में तब्दील
उरई। कोंच तहसील के जुझारपुरा से हिंगुटा गांव को जोड़ने वाली तीन किलोमीटर सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील है। हालत यह है कि इस पर पर आने-जाने में लोगों को बड़े-बड़े गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। तीन किलोमीटर के रास्ते में आधा घंटे से ज्यादा का समय लगता है।
केस - दो
सदूपुरा से शिवनी तक उखड़ी सड़क पर चलना मुश्किल
उरई। बंगरा मार्ग को जोड़ने वाली सदूपुरा से शिवनी गांव तक तीन किलोमीटर सड़क पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील है। लोगों का कहना है कि सड़क पर हुए गड्ढों में जैसे ही वाहन निकलता है। पलटने का डर बना रहता है, लेकिन इसके बाद भी सड़क को ठीक नहीं कराया जा रहा है।
कोंच तहसील की लगभग सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त कर दिया गया है। अगर कोई सड़क रह गई है तो उसे भी सही करा दिया जाएगा। -एचके गौतम, एई, प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी