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मुरादाबाद जेल भूमि घोटाला: बीस दिन में दो बार बिकी थी जेल की जमीन

Sun, 28 Oct 2018 11:56 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विजिलेंस जांच में जेल भूमि खरीद घोटाले का कच्चा चिट्ठा सामने आ गया है। प्रस्तावित जेल के लिए जिला प्रशासन ने जो भूमि खरीदी वह 20 दिन के भीतर दो बार बिकी थी। जेल के लिए चिन्हित होने से पहले यह भूमि किसानों के नाम पर थी। इस भूमि पर जेल का प्रस्ताव स्वीकृत होते ही अफसरों ने पूरी भूमि अपने करीबियों को खरीदवा दी। हाकिमों ने बाद में इन लोगों को चार गुना कीमत चुकाकर यह भूमि सरकार के पक्ष में खरीद ली। इस खरीद - फरोख्त में सरकार को करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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शासन के आदेश पर हुई विजिलेंस जांच में साबित हो चुका है कि तत्कालीन हलका लेखपाल से लेकर जिले में उस समय तैनात रहे डीएम तक इस खेल में शामिल थे। सभी ने अपने पदों का दुरुपयोग कर सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाई और परोक्ष रूप से आर्थिक लाभ लिए। सरकार के पक्ष में जब भूमि खरीद शुरू होने वाली थी उससे पहले ही इस सूचना को अपने करीबियों से साझा करके उन्हें सर्किल रेट पर भूमि खरीदवा दी।

जबकि नियमानुसार एक बार सरकारी योजना के लिए चिन्हित हो जाने के बाद इस भूमि की खरीद - फरोख्त पर रोक लग जानी चाहिए थी। लेकिन अफसरों ने ऐसा नहीं किया। जेल के लिए चिन्हित होने ही इस भूमि को तेजी से खरीदा - बेचा गया। जब भूमि किसानों के हाथों से निकलकर अफसरों के करीबियों के नाम पर दर्ज हो गई तब जिला प्रशासन ने इसकी खरीद शुरू की।
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सर्किल रेट का चार गुना दाम चुकाकर राज्यपाल के पक्ष में भूमि खरीदी गई। किसानों के भूमि खरीदने वाले अफसरों के करीबी व्यापारियों और कुछ नेताओं को 20 दिन के भीतर ही करोड़ों रुपये का मुनाफा हुआ। विजिलेंस ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को क्षति पहुंचाकर कमाए गए इस मुनाफे की बाद में अफसरों में भी बंदरबांट हुई।

किसानों के साथ भी हुआ धोखा
जेल के लिए जिन किसानों की भूमि खरीदी गई उन्हें सरकार की योजना का कोई लाभ नहीं मिला। चार गुना कीमत पर किसानों का हक था, लेकिन अफसरों की मिलीभगत ने उनके इस हक पर डाका डलवा दिया। यदि यह भूमि सीधे किसानों से खरीदी जाती तो किसानों को चार गुना कीमत मिलती। अफसरों के इस खेल से किसानों में भी गुस्सा है।

निर्यातक ने भी बेची तीन एकड़ भूमि 
एक निर्यातक ने भी जेल प्रोजेक्ट के लिए तीन एकड़ से अधिक भूमि सरकार को बेची। बेचने से कुछ दिन पहले ही यह भूमि खरीदी गई थी। निर्यातक का नाम अभी तक जांच के दायरे से बाहर है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह का कहना है कि निर्यातक ने खुद के हिस्से भी ज्यादा का बैनामा सरकार के पक्ष में कर ज्यादा रकम भी ले ली है। इस रकम को वापस करने के लिए निर्यातक को नोटिस जारी किया गया है।
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