सात सितंबर को जिले में हुए दंगे के दौरान फुगाना थाना क्षेत्र में सबसे अधिक हिंसा हुई थी। एसआईटी को जांच के लिए मिले दंगे के मुकदमों के आंकड़े इसकी पुष्टि करने के लिए काफी हैं।
एसआईटी को जांच के लिए जिले के कुल 535 मुकदमे दिए गए थे, जिनमें से 384 अकेले फुगाना थाना क्षेत्र से संबंधित हैं। शामली जनपद के 27 और मेरठ तथा बागपत के दो-दो मुकदमों की जांच भी एसआईटी ही कर रही है।
जनपद में 27 अगस्त से 10 सितंबर तक की अवधि में हुई हिंसक वारदातों को शासन ने दंगे से संबंधित माना है। इस अवधि में मुजफ्फरनगर के साथ ही शामली, मेरठ और बागपत की सीमावर्ती इलाकों में हुई हिंसा की वारदातों को भी दंगा ही माना गया। इसी के चलते शासन ने इन सभी वारदातों के दर्ज हुए मुकदमों की जांच एसआईटी को सौंपी है।
इस अवधि में मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बागपत में कुल 589 अपराधिक वारदातों के मुकदमे दर्ज हुए, जिनकी जांच एसआईटी को दी गई।
बाद में इनमें से 23 मुकदमों को दंगों से इतर मानते हुए इनकी जांच संबंधित थानों के सुपुर्द कर दी गई, जबकि शेष 566 मुकदमे एसआईटी के ही पास रहे। इनमें से 535 मुजफ्फरनगर, 27 शामली तथा दो-दो मुकदमे मेरठ और बागपत जनपद के हैं। जनपद के मुकदमों की बात करें तो कुल 535 मुकदमों में से सर्वाधिक 384 फुगाना थाना क्षेत्र के हैं।
इससे स्पष्ट है कि दंगे के दौरान फुगाना क्षेत्र में ही हिंसा की सर्वाधिक वारदातें हुईं। इनमें से एसआईटी की दो दिसंबर तक की जांच में आठ मुकदमों को फर्जी मानते हुए खारिज कर दिया गया। ये सभी मुकदमे भी फुगाना क्षेत्र के ही हैं।
एसआईटी के एएसपी मनोज कुमार झा ने बताया कि जिले के 535 मुकदमों की जांच अंतिम दौर में है और बहुत जल्द आरोपियों के नामों का खुलासा कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी जाएगी। अन्य जनपदों के मामलों की जांच भी इसी के समानांतर अंतिम दौर में है।