शहरी विकास के क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओ के सर्वे में सरकारी अधिकारियों का एक कारनामा सामने आया है।
पता चला कि 2001 की जनगणना में शामिल रहे 107 कस्बों में लाखों की आबादी को 2011 की जनगणना में शून्य कर दिया गया है।
इस गड़बड़ी से आने वाले समय में इन कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों के विकास के लिए होने वाले कार्यक्रम रुक जाएंगे।
ये रहे वो कस्बे
जिन कस्बों में स्लम जनसंख्या नहीं होने का आंकड़ा पेश किया गया, उनमें लखनऊ कैंट के साथ झांसी, मुजफ्फरनगर, मैनपुरी, सुल्तानपुर, गढ़मुक्तेश्वर (गाजियाबाद), फतेहपुर, आगरा कैंट, अतरौली (अलीगढ़), बिजनौर, अमरोहा, खुर्जा (बुलंदशहर) शामिल थे।
इन सभी स्थानों पर सरकारी आंकड़ों के उलट 27 से लेकर 110 तक बस्तियां मिलीं।
संस्था के कार्यक्रम समन्वयक फर्रुख रहमान खान ने बताया कि इन कस्बों की जनसंख्या के आंकड़ों में स्लम में रहने वाली आबादी को शून्य दिखाया गया, जबकि वहां चिह्नित बस्तियों में हजारों लोग अब भी रह रहे हैं।
केंद्र सरकार ने भी मांगी रिपोर्ट
इन आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त डॉ. सी. चंद्रमौलि ने भी जानकारी मांगी है। इसके लिए सभी 107 कस्बों और नगर निकायों की सूची प्रमुख सचिव, नगर विकास, यूपी सरकार को भी भेजी गई।
इसमें 2001 की जनगणना में स्लम में रहने वाली आबादी होने के बाद भी 2011 के आंकड़ों में शून्य हो जाने की बात कही गई है। इन आंकड़ों को जांचने के आदेश भी नगर विकास विभाग जारी कर चुका है।