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मुजफ्फरनगर दंगों के लिए जिम्मेदार नहीं: आजम

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यूपी सरकार में वरिष्ठ मंत्री और सपा के मुस्लिम चेहरे आजम खान ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों के लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं क्योंकि वे सरकार के मुखिया नहीं हैं।
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मंगलवार को दिल्ली में बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि इतना बड़ा दंगा हुआ तो आखिर चूक कहां हो गई।

तो उनका जवाब था, ''इस बारे में सीएम साहब (मुख्यमंत्री अखिलेश यादव) ज़्यादा बेहतर बता पताएंगे क्योंकि वो ही एक्ज़क्यूटिव हेड(सरकार के मुखिया) हैं।''

जब मैंने फिर पूछा कि क्या उस जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती, उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, ''एक्जक्यूटिव हेड मैं नहीं हूं, इसलिए इस तरह की मेरी ज़िम्मेदारी नहीं बनती।''

'मीडिया है जिम्मेदार'

अखिलेश यादव के इस्तीफ़े या फिर राज्य सरकार की बर्ख़ास्तगी की मांगों के बारे में पूछे जाने पर आजम खान का कहना था, ''मांग तो कोई भी कर सकता है।

आप इस हैसियत में हैं जैसा चाहें माहौल बना दें। यहां भी आप इस्तीफा ले लें और इसे भी बीजेपी के हवाले कर दें।''

कई विपक्षी पार्टियां और मानवाधिकार कार्यकर्ता 2002 में गुजरात में हुए दंगों के लिए मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग करते रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यही सवाल जब अखिलेश सरकार से किए जाने लगे तो इसका सीधा जवाब देने से बचते हुए आजम खान ने इसके लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया।

उनका कहना था, ''जैसा माहौल आप चाहेंगे वैसा बन जाएगा। एक कैमरा, एक व्यक्ति पूरे मुल्क को आग की लपेट में झोंक दे। क्या कर लेगा कोई।''

राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोगों के बारे में उन्होंने कहा कि वहां किसी चीज की कमी नहीं है।

हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया के लोग उन शिविरों का दौरा करने के बाद कह रहे हैं कि वहां के हालात बहुत खराब हैं और सरकार की तरफ से मदद न के बराबर है।

आजम खान ने कहा कि सरकार की यही कोशिश है कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से उनके घरों तक पहुंचाया जाए और उनकी पूरी हिफाजत की जाए।

गौरतलब है कि दंगों के बाद अपने गांवों को छोड़ने पर मजबूर हुए लगभग 50 हजार लोग इस समय विभिन्न राहत शिविरों, मस्जिदों, मदरसों और स्कूल-कॉलेज में रह रहे हैं।

'सिफारिशें लागू होंगी'

दंगा पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाने के बारे में पूछे जाने पर आजम खान का कहना था, ''हुकूमत की सतह पर जितने भी क़दम उठाए जाने थे।

उनमें कोई कसर नहीं उठाई गई है और कोशिश यही की गई है कि ज्यादा से ज़्यादा लोगों पर मरहम लगे। बाकी अदालत से जुड़े मामले हैं उनको वहीं देखेगी, उनमें हमलोग दखल नहीं दे सकते हैं।''

उन्होंने यकीन दिलाया कि मुजफ्फरनगर दंगों की जांच के लिए जो न्यायिक कमेटी बनाई गई है उनकी सभी सिफारिशों को उनकी सरकार लागू करेगी।

अखिलेश सरकार के सत्ता में आने के लगभग डेढ़ साल में उत्तर प्रदेश में सौ से भी ज्यादा दंगे होने की वजह पूछे जाने पर आजम खान ने कहा कि ये एक तफसीली बहस है जिस पर कभी और बातचीत होगी।

लेकिन ये पूछे जाने पर की आम तौर पर लोगों की ये धारणा है कि सांप्रदायिक दंगे राजनीतिक तौर पर समाजवादी पार्टी के लिए फायदेमंद हैं, इसके जवाब में उन्होंने पहले कहा कि ये केवल आरोप हैं जो साबित नहीं हुए हैं।
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उन्होंने इतना जरूर स्वीकार किया कि एक हादसा हुआ तो है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है।
दंगों के राजनीतिक लाभ के बारे में दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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