टेलीविजन पर एक विज्ञापन में एक अच्छी कंपनी में नौकरी मांगने गई युवती को बताया जाता है कि उसने जिस इंस्टीट्यूट से एमबीए किया है, उसे यूजीसी और एआईसीटीई से मान्यता नहीं प्राप्त है।
इस कड़वे सच को हर युवा दिन भर में एक बार अपने घर अथवा बाहर टीवी पर जरूर देखता है।
इसे देखने के बाद भी अभिभावक देश में मौजूद ऐसे ढेरों तकनीकी और प्रबंधन इंस्टीट्यूट के छलावे में फंसकर कॅरियर बर्बाद कर रहे हैं।
देश भर में इस समय 312 इंस्टीट्यूट अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की अनुमति के बिना चल रहे हैं।
इन संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वालों को आगे की पढ़ाई के लिए अच्छे संस्थानों में प्रवेश भी नहीं मिल रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें दिल्ली और महाराष्ट्र को मिलाने पर यह आंकड़ा दो सौ के पार पहुंच रहा है। इसमें से 20 संस्थान उत्तर प्रदेश में चल रहे हैं।
एआईसीटीई की ओर से जारी सूची में देशभर में खुले इंजीनियरिंग, प्रबंधन, टूरिज्म, फिल्म इंस्टीट्यूट एवं एमसीए कॉलेज शामिल हैं।
यह संस्थान एआईसीटीई से मंजूरी के बिना यहां से डिग्री-डिप्लोमा लेने वाले छात्रों को किसी प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश एवं नौकरी नहीं मिल सकती है।
एआईसीटीई की मंजूरी के बिना आंध्र प्रदेश में 49, बिहार में 3, चंडीगढ़ में 8, दिल्ली में 67, गोवा में 2, गुजरात में 2, हरियाणा में 20, हिमांचल में 1, झारखंड में 4, कर्नाटक में 24, महाराष्ट्र में 127, उड़ीसा में 1, पंजाब में 4, राजस्थान में 3, तमिलनाडु में 11, उत्तराखंड में 2, उत्तर प्रदेश में 20 एवं पश्चिम बंगाल में 25 संस्थान चल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में अधिकांश संस्थान प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चल रहे हैं। इन संस्थानों में एकेडमी ऑफ टेक्नालॉजी एंड मैनेजमेंट ग्रेटर नोयडा, कॉलेज ऑफ हास्पिटलिटी एवं टूरिज्म लखनऊ, एडवाइजर दि एजुकेशन एकेडमी लखनऊ, आगरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी आगरा, एनी बेसेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट लखनऊ, एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टीवी नोयडा,भारतीय शिक्षा परिषद, लखनऊ, दीन दयाल उपाध्याय इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कानपुर आदि शामिल हैं।