यूपी बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में विद्यार्थी मातृभाषा हिन्दी में ही मात खा गए।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस तथ्य से हैरान हैं कि हिन्दी विषय में प्रदेश के तीन लाख 42 हजार 374 विद्यार्थी फेल हो गए। हिन्दी का रिजल्ट 90.87 से कम होकर 82.48 फीसदी हो गया।
हिन्दी में फेल वालों को पास होने का कोई मौका नहीं है इसलिए यह बड़ा झटका है। विद्यार्थियों में गणित का डर अब भी कायम है। गणित में महज 73.31 फीसदी ही विद्यार्थी पास हुए।
विज्ञान के रिजल्ट 88.73 से कम होकर 83.57 फीसदी हो गया। सामाजिक विज्ञान का रिजल्ट 92.72 फीसदी से कम होकर 89.98 फीसदी हो गया। मानव विज्ञान का परिणाम सबसे अच्छा रहा।
33 लाख से अधिक विद्यार्थी जिन्होंने पूरी परीक्षा दी, उसमें से केवल 25 हजार को हिन्दी में 91 या अधिक अंक मिले। लगभग 40 फीसदी छात्र ऐसे हैं जिन्हें हिन्दी में 50 फीसदी अंक जुटाने में पसीने छूट गए। हिन्दी में प्रथम श्रेणी के अंक पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 30 फीसदी तक सिमट गई।
ग्रेडिंग के तहत अंकपत्र पर विषय के आगे नंबर दर्ज हैं लेकिन साथ में नाइन प्वाइंट ग्रेडिंग भी है। कुल प्राप्तांक के स्थान पर नंबर या ग्रेड प्वाइंट के बजाय केवल पास या फेल दर्ज है।
इसके अलावा इंप्रूवमेंट, कंपार्टमेंट और क्रेडिट सिस्टम भी लागू है। कंपार्टमेंट में दो विषयों में फेल होने वाले छात्रों को एक विषय में परीक्षा देकर पास होने का मौका दिया गया है।