हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी के खिलाफ मात्र आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आधार पर उसका शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर देना उचित नहीं है। कोर्ट ने डीएम बलिया के आदेश को रद्द करते हुए उनको तीन माह में नए सिरे से निर्णय लेने के लिए कहा है।
मगर यह भी कहा है कि याचिका मंजूर होने का आशय यह नहीं है कि याची का लाइसेंस स्वत: बहाल हो गया है। याची चाहे तो नियमानुसार फिर से लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकता है। राम भवन यादव की याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता परवेज इकबाल का कहना था कि याची के खिलाफ जानलेवा हमला करने की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके आधार पर उसका रिवाल्वर का लाइसेंस चार जुलाई 2009 को लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।
याची ने वाराणसी के लंका थाने में अपना शस्त्र जमा कर दिया है। याचिका में कहा गया कि याची ने अपने लाइसेंसी शस्त्र का दुरुपयोग नहीं किया है। अदालत के ऐसे कई फैसले हैं जिनके मुताबिक सिर्फ मुकदमा दर्ज होने के आधार पर लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता है।