उत्तरप्रदेश में हाथरस में एक ही परिवार के तीन हत्याओं के आरोपी की अजब कहानी सामने आई है। उस पर एक ही परिवार की तीन हत्याओं के आरोप लगे।
एक में उसे कोर्ट ने बरी कर दिया और शेष दो हत्याओं में वह अभी भी आरोपी है। अब स्थिति यह है कि पांच साल पहले राजस्थान में उसकी दुर्घटना में कथित रूप से मौत हो चुकी है।
इस दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज कर राजस्थान पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम भी करा दिया, लेकिन स्थानीय पुलिस को इस पर विश्वास नहीं हुआ। मामला और ज्यादा संदिग्ध तब हो गया, जब ग्राम प्रधान ने पुलिस को लिखकर दे दिया कि इस आरोपी की मौत बीमारी से हुई थी।
अब स्थिति यह है कि राजस्थान में यह शख्स मर चुका है और यूपी में अभी जिंदा है। हत्यारोपी का मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट ने पुलिस को इस मामले में आख्या सहित तलब किया है।
1991 में हुई थी एक ग्रामीण की हत्या
यह अजब मामला थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव बौजिया का है। वहां वर्षों से दो पक्षों में रंजिश चल रही थी। वर्ष 1991 में इसी रंजिश के चलते 23 फरवरी 1991 को उमराव सिंह की हत्या कर दी गई।
हत्या की नामजद रिपोर्ट उदयवीर, चंद्रपाल, मोरमुकुट और कमल सिंह के खिलाफ हुई। मामला कोर्ट में चला। कोर्ट में उदयवीर और कमल सिंह को दोषमुक्त कर दिया और शेष को आजीवन कारावास की सजा सुना दी।
दो बेटों की फिर हुई हत्या, तीनों में बना आरोपी
मामला यहीं नहीं थमा। खूनी रंजिश जारी रही और 13 नवंबर 2003 को उमराव सिंह के बेटे धारा सिंह की हत्या हुई। इस हत्या की रिपोर्ट फिर गांव के ही उदयवीर सहित तीन के खिलाफ दर्ज हुई।
यह रिपोर्ट मृत धारा सिंह के बड़े भाई रामवीर सिंह ने दर्ज कराई। उसके बाद वर्ष 2008 में इस रंजिश का शिकार बना रामवीर सिंह। 25 फरवरी 2008 को रामवीर सिंह की हत्या कर दी गई। इस हत्या की रिपोर्ट फिर उदयवीर सिंह सहित तीन अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई।
पिता उमराव सिंह और उसके दो बेटों की इस रंजिश में हत्या हो गई। रामवीर का मुकदमा भी यहां कोर्ट में विचाराधीन है।
2008 में दुर्घटना में कथित मौत, शव का पोस्टमार्टम
मामले में नया मोड़ तब आया, जब इन हत्याओं के आरोपी उदयवीर सिंह की कथित रूप से राजस्थान में वर्ष 2008 में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। राजस्थान के दौसा जिले के महबा थाने में 20 जुलाई 2008 को यह रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि जब उदयवीर व अन्य लोग बालाजी के दर्शन कर वापस लौट रहे थे तो 19 जुलाई को उनकी इंडिका कार रात में सवा 12 बजे अचानक सड़क पर खड़े ट्रक से टकरा गई। इसमें उदयवीर की मौत हो हो गई और एक अन्य घायल हो गया। राजस्थान पुलिस ने उदयवीर पुत्र चक्खन सिंह, जोकि तीन हत्याओं का आरोपी था, के नाम से ही उसके शव का पोस्टमार्टम भी करा दिया।
स्थानीय पुलिस ने नहीं किया विश्वास
कथित मृतक चूंकि यहां हत्यारोपी है, इसलिए पुलिस को इस पर सहज की विश्वास नहीं हुआ। परिणामस्वरूप इस मामले में कोर्ट ने उदयवीर की पूरी मृत्यु आख्या मांगी और संबंधित पुलिस अधिकारियों व विवेचक को नोटिस दिया।
एक विवेचक सोमपाल सिंह ने यह जवाब दिया कि इस अभियुक्त की मौत होना प्रमाणित नहीं हुआ है। उसने इस मामले में राजस्थान में एक्सीडेंट के मुकदमे की विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारी व पंचायतनामा तैयार करने वाले पुलिस अधिकारी को बुलाने की बात कही।
फंसा नया पेच, प्रधान ने बताई बीमारी से मौत
पूरे मामले में नया पेच फिर आ गया, जब ग्राम प्रधान ने यह लिखकर पुलिस को दे दिया कि उदयवीर की मौत बीमारी से हुई थी। अब स्थिति यह है कि उदयवीर की मौत की पुष्टि न्यायालय में नहीं हुई है, जबकि पांच साल पहले राजस्थान में उसके शव का पोस्टमार्टम भी हो चुका है। आखिर किस तरह से मरा यह हत्यारोपी और क्या वास्तव में मरा भी है या नहीं। यह सवाल अभी पहेली बने हुए हैं। कोर्ट ने इन अभियुक्त की मृत्यु आख्या के साथ पुलिस को तलब किया है।
तो सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली थी उदयवीर ने
धारा और रामवीर सिंह के परिजन नहीं मानते उदयवीर मर गया है। इनका कहना है कि वह तो बेहद शातिर किस्म का व्यक्ति है। वह रहने वाला तो इसी गांव का था लेकिन उसने राजस्थान में भरतपुर का फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज बनवाकर सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली थी।
रामवीर के बड़े भाई भगवान सिंह से जब इस सिलसिले में उनके घर पर जाकर बात की गई तो उनका कहना था कि उदयवीर जीवित ही होगा और उसने केसों से बचने के लिए यह सारा नाटक किया है।
उनका कहना है कि पुलिस भी इस पूरे मामले में लापरवाही बरत रही है। जब उदयवीर को मृत नहीं माना जा रहा है और वह इन दोनों हत्याओं में फरार चल रहा है तो फिर उसके यहां की कुर्की क्यों नहीं हो रही।
केसों से बचने को किया होगा नाटक
यही बात उसकी बहन कल्ला ने कही। उसका कहना है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके परिवार में तीन हत्याएं कर दी। उदय सिंह का कोई पता नहीं है और उसे मृत बताया जा रहा है।
कभी यह कहा जाता है कि वह एक्सीडेंट में मरा तो कभी यह कहा जाता है कि वह बीमारी से मरा, लेकिन यह सब एक नाटक ही है। वह निश्चित ही केसों से बचने के लिए कहीं छिपा होगा।