हाथरस। अपना जिला मंगलवार को 19 साल का हो जाएगा। बीते 19 सालों में जिले ने बहुत कुछ पाया है तो कुछ खोया भी है। अफसोस तो यह है कि इतना लंबा समय बीतने के बावजूद जिले का बुनियादी ढांचा अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है। जिला कारागार और जिला न्यायालय के भवन बनने तो दूर, इनके लिए जमीन तक फाइनल नहीं हो सकी है। हालांकि इन दोनों प्रोजेक्ट पर शासन-प्रशासन तेजी से काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि इस साल में इन भवनों का भी श्रीगणेश हो जाएगा। जिला अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस तो बन गए, लेकिन उनमें जिला स्तरीय सुविधाओं का आज तक अकाल है। जिला सहकारी बैंक के मामले में भी जिला आज भी अलीगढ़ और मथुरा जिलों पर निर्भर है। फोन और डाक सेवाओं के लिहाज से भी जिला अलीगढ़ और मथुरा का मोहताज है। जब तक इन विभागों का पूरा कार्यक्षेत्र हाथरस के अधीन नहीं आ जाता, तब तक जिले का स्वरूप अधूरा ही कहा जाएगा। नौ साल पहले जिला समाप्ति का दंश भी यहां के लोगों ने झेला।
न्यायालय भवन को जल्द मंजूरी की आस
जिला न्यायालय भवन निर्माण का रास्ता इस साल के आखिर तक खुल सकता है। हालांकि तत्कालीन डीएम शमीम अहमद इसी साल मुरसान रोड पर कलेक्ट्रेट के आसपास 88 किसानों की जमीन खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेज चुके हैं। इन किसानों को जमीन की कीमत देने के लिए करीब 90 करोड़ की धनराशि की मांग भी शासन से की जा चुकी है। अब इस पर फैसला शासन को करना है।
कारागार निर्माण का जल्द खुलेगा रास्ता
जिला कारागार के लिए सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र पर कारागार विभाग ने जमीन पसंद कर ली है। अब इस जमीन को राज्य औद्योगिक विकास निगम की तरफ से कारागार विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि यह भी जल्द फाइनल हो जाएगी, जिसके बाद जेल निर्माण का रास्ता खुल जाएगा।
पांच बार बदला जिले का नाम
बीते 19 सालों में जिले का नाम भी राजनीतिक खींचतान में फंसा रहा है। तीन मई 1997 को बसपा सरकार ने जिले का सृजन महामायानगर के नाम से किया, जिसे बाद में कल्याण सिंह सरकार ने बदलकर हाथरस कर दिया। फिर बसपा सत्ता में आई तो नाम महामायानगर हो गया, लेकिन मुलायम सरकार ने फिर इसका नाम बदलकर हाथरस कर दिया। तीसरी बार बसपा आई तो जिले का नाम महामायानगर हुआ और मौजूदा सपा सरकार ने फिर इसे हाथरस नाम दे दिया।
19 साल में जिले का जितना विकास हुआ है, वह सब बसपा की देन है। भाजपा, सपा सरकारों ने इसे सिवाय बर्बादी के कुछ नहीं दिया। यह जिला बसपा और मेरे प्रयासों की देन है। मैने अपना मंत्री और विधायक पद दांव पर लगाकर जिला बनवाया। तालाब पर ओवरब्रिज की मांग सांसद सीमा उपाध्याय ने रेल मंत्रालय तक पहुंचाई। संसद में भी उठाई। जिले में 40 33 केवी बिजलीघर, मीतई पर 220 केवी, तीन 132 केवी और सिकंदराराऊ-अलीगढ़ बॉर्डर पर 400 केवी बिजलीघर मैने स्वीकृत कराए।
-रामवीर उपाध्याय, विधायक व पूर्व मंत्री
बसपा शासन में यह जिला पूर्व मंत्री और उनके परिवार के आतंक से बर्बाद हुआ। उद्योग बंद हो गए। व्यापारी पलायन कर गए। मैने सादाबाद को राजकीय डिग्री कॉलेज, आईटीआई और तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज की सौगात दिलवाई है। पराग डेयरी जल्द चालू होगी। सपा सरकार ने सबसे ज्यादा जिले का विकास किया है। जल्द ही सीएम को बुलाकर यहां के लिए कोई बड़ी घोषणा कराई जाएगी।
-देवेंद्र अग्रवाल, विधायक सादाबाद
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जिला बसपा की देन है। यहां का आधारभूत ढांचा बसपा सरकार ने तैयार किया। विपक्षी दलों ने यहां कुछ नहीं दिया। 19 साल में जिले का विकास तेजी से हो रहा है। तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज के लिए मैने विधानसभा में सवाल उठाया और कई बार लोनिवि मंत्री से पत्राचार किया। केंद्रीय विद्यालय, हाइवे और सिकंदराराऊ का राजकीय विद्यालय बसपा की देन है।
-गेंदालाल चौधरी, विधायक हाथरस
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हाथरस के विकास में भाजपा सरकारों का भी योगदान है। सबसे बड़ी उपलब्धि रेल बजट में तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज की मंजूरी, सिटी रेलवे स्टेशन के ट्रैक के विद्युतीकरण और रेल सुविधाओं का विस्तार रही है। केंद्र सरकार से प्रत्येक गांव के विकास के लिए 80 लाख रुपये जल्द मिलेंगे। पराग डेयरी चालू कराने की मांग मैने शासन तक उठाई थी, जोकि जल्द चालू होगी।
-राजेश दिवाकर, सांसद हाथरस