हाथरस में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए न तो कोच हैं और न ही जरूरी संसाधन। शहर से आठ किलोमीटर दूर बनाया गया स्टेडियम भी खिलाड़ियों की पहुंच से दूर है। इस स्थिति में खेलेगा इंडिया-बढ़ेगा इंडिया का सपना कैसे साकार हो सकेगा, इसका अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है।
खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर पर भले ही दावे किए जा रहे हों, लेकिन जिले के खेल स्टेडियम की हकीकत बिल्कुल इससे अलग है। जिले में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए न तो कोच हैं और न ही जरूरी संसाधन। शहर से आठ किलोमीटर दूर बनाया गया स्टेडियम भी खिलाड़ियों की पहुंच से दूर है। इस स्थिति में खेलेगा इंडिया-बढ़ेगा इंडिया का सपना कैसे साकार हो सकेगा, इसका अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है।
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जिले में जिला प्रशासन की ओर से लाखों रुपये खर्च कर शहर से आठ किमी दूर खेल स्टेडियम बनवाया गया है। इस स्टेडियम को मार्च 2017 में शुरू किया गया। स्टेडियम बनने से यहां खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि अब उन्हें अभ्यास के लिए बेहतर संसाधन मिल सकेंगे और प्रशिक्षित कोच का मार्गदर्शन मिल सकेगा, लेकिन यह स्टेडियम खिलाड़ियों की उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया। यहां खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए न तो कोई सुविधा मिल सकी है और न हीं कोच हैं। स्टेडियम केवल कार्यक्रमों का आयोजन स्थल बनकर रह गया है।
स्टेडियम में कोच की तैनाती नहीं है। इस कारण खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं आते हैं। शहर से दूर होने के कारण भी यहां खिलाड़ी नहीं आ पाते हैं। खिलाड़ियों के अभ्यास करने के लिए यहां संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। -अनिल कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी