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मौसम बदला, बढ़ी ठंड से ठिठुरे लोग

Wed, 07 Dec 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला, हाथरस
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कोहरे की धुंध के कारण लाइट जलाकर वाहन चलाते और ठंड की वजह से एक हाथ जेब में डालकर गुजरते वाहन चालक। - फोटो : अमर उजाला
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सर्दी लगातार परवान चढ़ रही है। एक तरफ घने कोहरे ने सुबह-शाम वातावरण को अपने आगोश में ले रखा है। वहीं अब बिना धूप के ठिठुरन का अहसास होने लगा है। ठंड से बचाव के लिए लोगों ने संसाधन तलाशने शुरू कर दिए हैं।
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मंगलवार की सुबह भी मौसम काफी सर्द रहा। वातावरण में कोहरे की हल्की चादर बिछी रही। ठंड से बचने के लिए लोग कई जगह अलाव का सहारा लेते नजर आए। शाम को ठिठुरन बढ़ने से लोग जल्दी घरों में कैद हो गए। 

दिसंबर माह को एक हफ्ता बीत गया है। ऐसे में तापमान में लगातार गिरावट आती जा रही है। सुबह लोग जल्द ही आसमान में सूरज के दिखाई देने का इंतजार करते हैं। धूप निकलने के बाद ही ठंड से निजात मिल पाती है। इसी तरह दोपहर में घर के अंदर ठिठुरन का अहसास होता है।
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हालांकि अधिकतर लोग दोपहर के समय घरों की छतों पर नजर आते हैं। इसी तरह शाम के समय लोग रूम हीटर का प्रयोग कर अपने तन को सर्दी से बचा रहे हैं। बच्चे और वृद्ध लोग सुबह से शाम तक गर्म कपड़ों में नजर आ रहे हैं तो वहीं बाजारों में भी गर्म कपड़ों की बिक्री में लगातार इजाफा हो रहा है। रात के कोहरे में वाहनों को दौड़ाना वाहन चालकों के लिए कठिन साबित हो रहा है। 

ठंड के मौसम में सांस रोगियों की सांस उखड़ने लगी है। ठंड का मौसम उनके लिए बेहद परेशानी का सबब बन गया है। काफी संख्या में श्वांस रोगी जिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसी तरह न्यूमोनिया के रोग ने मासूमों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। सर्दी, जुकाम और खांसी और बुखार से बच्चों पर शिकंजा कस रहे हैं। इस रोग से पीड़ित बच्चों की संख्या भी सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में बढ़ती जा रही है। 

वहीं पिछले दो दिन से पड़ रहे घने कोहरे से आलू किसान की चिंताएं बरकरार हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह कोहरा आलू की फसल के लिए पाले के रूप में कभी भी मुसीबत बन सकता है।
मौजूदा समय में किसान अपनी आलू की फसल की धराई का काम निपटा चुका है। अधिकांश आलू की फसल मौजूदा समय में 30 से 60 दिन के बीच की हो चुकी है।

किसान के सामने करीब एक महीने तक इस फसल को सुरक्षित रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। दिसंबर में मौसम ने करवट बदल ली है। किसानों को यह अनुमान तो था कि नवंबर के बाद ठंड बढ़नी है, लेकिन कोहरा समय से पूर्व अधिक प्रभावी होता है तो आलू की फसल का रोगग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाएगी, क्योंकि आलू को अगर पाल की शिकायत होती है तो फसल की औसत पैदावार सामान्य फसल से काफी कम रह जाती है, इसलिए किसानों ने कोहरे के प्रकोप से फसल को बचाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे उनकी फसल किसी भी प्रकार स कोहरे आदि से प्रभावित नहीं हो।

मौजूदा ठंड और कोहरे से तो अभी पाले की संभावना नहीं हैं। अगर पारा अधिक नीचे जाता है और पाला पड़ता है। इससे आलू की फसल में पाले से नुकसान होने की संभावना बढ़ती है।
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- डॉ. एके सिंह, कृषि वैज्ञानिक
 
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