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मातेश्वरी भद्रकाली का चमत्कारों से भरा पड़ा है इतिहास

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हाथरस : सहपऊ के मंदिर में मां भद्रकाली की मूर्ति। संवाद - फोटो : SHAPHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
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माता भद्रकाली का मंदिर कस्बे की पूर्व दिशा में स्थित है। यह मंदिर अनगिनत चमत्कारों का साक्षी है। किवदंती है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने कराया था और कंस के सुसर जरासंध द्वारा मथुरा पर किए गए आक्रमण के समय यहां पर सुरक्षा दृष्टि से एक चौकी की भी स्थापना की थी। समय बीतने के साथ यह मंदिर नष्ट होता गया। इसके बाद इस मंदिर को मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा भी तुड़वाया गया, लेकिन हर बार मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा। वर्तमान में इस स्थान पर भव्य मंदिर विद्यमान है।
बुजुर्गों का कहना है कि एक बराती द्वारा धृष्टता करने पर मां के श्राप से पूरी बरात पत्थर में बदल गई थी। इस बरात के अवशेष आज भी पाषाण खंड के रूप में मंदिर के परिसर में मौजूद हैं। वर्तमान में पुरातत्व विभाग द्वारा भी इस मंदिर में कार्य कराया जा रहा है। पुरातत्व विभाग ने 44 लाख 28 हजार रुपये की धनराशि से मंदिर में ग्रेनाइट पत्थर बिछाने, पत्थरों की बेंचें लगवाने, हाईमास्क लाइट लगवाने के साथ सफेद संगमरमर के पत्थर लगाने का भी कार्य कराया गया है। मंदिर कमेटी ने मां के भवन के साथ पास श्रद्धालुओं को रात में रुकने के लिए धर्मशाला का भी निर्माण कराया है।
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मंदिर परिसर में जिन भक्तों की मनोकामना पूर्ण हुई हैं, उन्होंने भी फर्श एवं अन्य मंदिरों का निर्माण कराया है। इसके पास ही भगवान भोलेनाथ के भव्य मंदिर का निर्माण उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पंकज शुक्ला द्वारा कराया गया है। यह मंदिर जिले का एक अनूठा एवं बेजोड़ मंदिर है। इसकी ख्याति अब दूर-दूर तक फैलने लगी है। महीने के प्रत्येक सोमवार को मां के मंदिर पर मेला लगता है। नवरात्र में तो यहां काफी श्रद्धालु दूर से आकर भंडारा भी करते हैं।
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मां के दरबार में जो भक्त सच्चे मन एवं श्रद्धा से आकर मांगता है, मां उसकी मनोकामना पूरी करती है। मां में असीम शक्ति है। इस कारण देश के कोने-कोने से भक्तगण इसके दर्शन करने आते हैं। मंदिर महाभारत काल का है। इसका वर्णन श्रीमद् भागवत कथा में भी आता है।
-अमित शुक्ला, मंदिर पुजारी
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