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Hathras: पीसी बागला कॉलेज प्रबंध समिति ने प्रशासन को घेरा, कहा- सीडी की क्यों नहीं कराई गई थी फॉरेसिंक जांच

Thu, 27 Mar 2025 01:25 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस के पीसी बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर पर छात्राओं का यौन शोषण और अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है। मामले पर कॉलेज की प्रबंध समिति ने अपना पक्ष रखते हुए प्रशासन से पूछा है कि सितंबर 2023 में हुई इस शिकायत के साथ सीडी में वीडियो भी भेजी गई थी, उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने सीडी की फॉरेसिंक जांच क्यों नहीं कराई।
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पीसी बागला डिग्री कॉलेज हाथरस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छात्रा के यौन शोषण प्रकरण में बागला डिग्री कालेज की प्रबंध समिति ने अपना पक्ष रखा और पहली शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने के लिए प्रशासन को घेरा है। समिति अध्यक्ष ने कहा कि सितंबर 2023 में हुई इस शिकायत के साथ सीडी में वीडियो भी भेजी गई थी, उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने सीडी की फॉरेसिंक जांच क्यों नहीं कराई।

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प्रबंध समिति के अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग और सचिव प्रदीप कुमार बागला ने बुधवार को कॉलेज में पत्रकार वार्ता की। इन्होंने बताया कि पहली शिकायत सीडी के साथ डीएम और क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी आगरा को भी की गई थी और उन्होंने अलग-अलग दो समितियां जांच के लिए बनाई थी। सीडी में छात्राओं के साथ प्रोफेसर के वीडियो थे, जिन्हें समितियों के सदस्यों ने भी देखा होगा। ये सीडी की फॉरेंसिंक जांच कराने में सक्षम थे, लेकिन फिर भी दोनों ही समितियों ने डा. रजनीश को अपराधमुक्त किया था। ऐसे में सीडी के आधार पर प्रबंध समिति के कार्रवाई नहीं करने को दोषी माना जा रहा है, यह तर्क संगत नहीं है और दोहरा मापदंड है। उन्होंने कहा कि 60 वर्षों से अधिक समय से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत संस्थान की छवि को अकारण धूमिल किया जा रहा है।

मुकदमा दर्ज होते ही कर दिया प्रोफेसर को निलंबित
इस प्रकरण में डॉ. रजनीश पर विलंब से कार्रवाई करने के आरोप को प्रबंध समिति ने निराधार बताया और कहा कि मुकदमा दर्ज होते ही उसे निलंबित कर दिया है। शिकायतकर्ता ने गत छह मार्च 2025 को अध्यक्ष एवं सचिव को शिकायती पत्र भेजा। सचिव तत्काल महाविद्यालय पहुंचे। प्राचार्य से वार्ता की और 10 मार्च को पत्र जारी कर आख्या मांगी। प्राचार्य ने इस प्राथमिक जांच शुरू की। इसी दौरान 13 मार्च को प्रशासन ने रजनीश के खिलाफ हाथरस गेट में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसकी सूचना मिलते ही प्राचार्य ने 15 मार्च को रजनीश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके हाथरस से बाहर जाने पर भी प्रतिबंध लगाया। निलंबन आदेश को प्रबंध समिति की बैठक में मान्य कर लिया गया।

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डाकघर से मांगी थी सीसीटीवी फुटेज

अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग ने बताया कि पहली शिकायत जिस छात्रा के नाम से की गई, उसे बुलाया गया। वह अपने माता पिता के साथ कॉलेज आई और लिखित बयान दिया कि उसने कोई शिकायत नहीं की है। डीएम को संबोधित एक शपथ पत्र दिया। इसके बाद कॉलेज की जांच समिति ने यह मान लिया था कि डॉ. रजनीश और युवती को बदनाम करने के लिए यह शिकायत की गई है। शिकायत हाथरस के मुख्य डाकघर से पोस्ट की गई थी। वहां से भी शिकायत कर्ता की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरे की फुटेज मांगी गई। लेकिन पोस्टमार्टम ने सीसीटीवी कैमरे खराब होने की बात कही। यदि यह फुटेज मिल जाती तो तभी स्थिति साफ हो जाती।

केवल कक्षाओं में लगे थे सीसीटीवी कैमरे
प्रबंध समिति का कहना है कि कॉलेज में केवल कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगे है, भूगोल ही नहीं बल्कि किसी भी विभाग के कक्ष में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए थे। इसलिए यह आरोप निराधार है कि भूगोल विभाग के कक्ष में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे।अब सभी 15 विभागों कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

अप्रत्यक्ष रूप से गुटबाजी की स्वीकारी बात
प्रबंध समिति के अध्यक्ष का कहना है कि कालेज में प्रत्यक्ष रूप से गुटबाजी नहीं है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से अंदरखाने गुटबाजी हो सकती है, इससे हम इंकार नहीं कर सकते। डा. रजनीश को बर्खास्त करने की बात पर कहा कि प्रबंध समिति के पास इसका अधिकार है, वह डा. रजनीश को बर्खास्त कर सकती है। इसे लेकर कार्रवाई चल रही है।
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