सिकंदराराऊ के बहुचर्चित सत्संग हादसे पर बृहस्पतिवार को अपर सत्र एवं जनपद न्यायाधीश कोर्ट संख्या-01 में सुनवाई हुई। इस दौरान 44वें गवाह के रूप में उपनिरीक्षक राजकुमार (तैनाती थाना गांधी पार्क, अलीगढ़) की गवाही दर्ज की गई। अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी।
उपनिरीक्षक राजकुमार ने अदालत को बताया कि दो जुलाई 2024 को वे अलीगढ़ के बन्ना देवी थाने में तैनात थे। सत्संग में मची भगदड़ के बाद लगभग 38 मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल अलीगढ़ पहुंचे थे। उन्हें पोस्टमार्टम से जुड़ी पंचायतनामा की कार्यवाही के लिए अस्पताल भेजा गया था।
उन्होंने महिला कांस्टेबल कमलेश कुमारी की उपस्थिति में मृतका संगीता देवी पत्नी धर्मवीर सिंह निवासी एत्मादपुर, आगरा के शव की पहचान उनके परिजनों से कराई और पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार के लिए सुपुर्द कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता ने उपनिरीक्षक से तीखी जिरह की।
इस दौरान यह बात सामने आई कि पंचायतनामा दो जुलाई 2024 को भरा गया था, लेकिन कागजों पर गलती से वर्ष 2022 दर्ज हो गया था। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि पंचायतनामा में पांच के बजाय केवल चार पंच नियुक्त किए गए थे। साथ ही, सीएमओ की चिट्ठी व रिपोर्ट में नाम के संशोधन और दस्तावेजों पर बिना लघु हस्ताक्षर के ओवरराइटिंग का मामला भी सामने लाया गया। उपनिरीक्षक ने बचाव पक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि यह किसी अन्य घटना का शव था या मुआवजे के लिए इसे इस घटना से जोड़ा गया।