परचून की दुकान संभाल रहीं खुशबू। स्रोत : स्वयं
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ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वरोजगार के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव खेरिया की खुशबू ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने परचून की दुकान संचालित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।
करीब चार वर्ष पहले खुशबू ने स्वयं सहायता समूह और ऋण की सहायता से गांव में एक छोटी परचून की दुकान शुरू की थी। शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ कारोबार शुरू हुआ, लेकिन मेहनत और लगन के बल पर दुकान की बिक्री बढ़ती गई। कारोबार से हुई आय के सहारे उन्होंने लगभग दो वर्ष में लिया गया ऋण भी चुकता कर दिया।
खुशबू बताती हैं कि कारोबार बेहतर होने पर उन्होंने दोबारा ऋण लेकर दुकान का विस्तार किया। अब उनकी दुकान पर दैनिक जरूरतों का अधिकांश सामान उपलब्ध रहता है, जिससे गांव के लोगों को भी सुविधा मिल रही है। दुकान से होने वाली आय परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। ग्रामीण अंचल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आत्मनिर्भरता की यह कहानी सामाजिक बदलाव की सकारात्मक तस्वीर पेश कर रही है। खुशबू की मेहनत और सफलता आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
परिवार और कारोबार, दोनों संभाल रहीं
खुशबू घर की जिम्मेदारियों के साथ दुकान का संचालन भी बखूबी कर रही हैं। सुबह घरेलू कार्य निपटाने के बाद वह दुकान संभालती हैं और ग्राहकों की जरूरतों का ध्यान रखती हैं। उनका कहना है कि मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।