पिछले माह चीन में कोरोना की आहट का असर हाथरस के रंग-गुलाल कारोबार पर पड़ा। उद्यमियों ने रंग-गुलाल पर्याप्त मात्रा में तैयार नहीं किया। होली नजदीक आते ही रंग-गुलाल की एकाएक मांग बढ़ गई है। ऐसे में कारोबारियों के पास माल कम पड़ गया है।
जिले में रंग और गुलाल का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। जिले में 20 से ज्यादा रंग-गुलाल बनाने के कारखाने हैं, जहां करीब 25 करोड़ सालाना टर्नओवर का कारोबार किया जाता है। कोरोना के चलते बीते दो साल कारोबार पहले ही काफी धीमा पड़ गया था। वहीं, पिछले माह जनवरी में चीन में एक बार फिर कोरोना की आहट होने के कारण रंग-गुलाल कारोबारी सहम गए। कारोबारियों को यह डर सता रहा था कि फिर से कहीं माल बच न जाए। इसलिए कारोबारियों ने रंग व गुलाल का उत्पादन कम किया।
देश में कोरोना का प्रभाव खत्म होने और होली नजदीक आते ही बाजार में लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में रंग-गुलाल की जमकर मांग की जा रही है। जिले की फैक्टरियों में काफी आर्डर आने शुरू हो गए हैं। हालांकि ऑर्डर के हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसका असर खुदरा बाजार पर भी दिखने लगा है। बाजार में रंग-गुलाल कम बिक रहा है। कुछ दुकानदार इसका फायदा उठाते हुए बढ़े हुए दाम पर रंग-गुलाल बेच रहे हैं।
जनवरी माह में चीन में कोरोना ने दस्तक दे दी। ऐसा लगा कि फिर से कोरोना भारत में न फैल जाए। इसलिए इस बार माल कम तैयार किया गया है। अब माल की डिमांड काफी हो गई है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
- कृष्णा गर्ग, गुलाल उद्यमी
कोरोना के चलते बीते दो साल से रंग गुलाल की बिक्री प्रभावित हो रही थी। जनवरी माह चीन में कोरोना ने एक बार फिर दस्तक दी तो कारोबार पर असर पड़ना शुरू हो गया था। ऐसे में रंग-गुलाल कम तैयार किया गया। अब अचानक डिमांड बढ़ गई है।
- देवेंद्र गोयल, रंग उद्यमी