संवाद न्यूज एजेंसी, मुरसान-हाथरस।
कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को डीएम रमेश रंजन ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उसके जिला पंचायत अध्यक्ष ने वहां मौजूद जिला पंचायत सदस्यों को शपथ दिलाई। इस मौके पर 14 सदस्यों ने ही शपथ ली और अन्य सदस्य शपथ लेने के लिए नहीं आए। सीमा उपाध्याय का वहां स्वागत भी किया गया। उल्लेखनीय है कि सीमा उपाध्याय पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी हैं। वह इससे पहले भी वह दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं।
कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को डीएम रमेश रंजन ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद सीमा उपाध्याय ने वहां मौजूद 14 सदस्यों को शपथ दिलाई। इसमें पिंकी, राजा गरूड़ध्वज सिंह, पंजाबी लाल, राजेश दिवाकर, उमाशंकर गुप्ता, निहाल सिंह, गुंजन शर्मा, वरुण गौतम, प्रभा सिंह, रानू जादौन, आरती, राधा परमार, सोनू चौहान, शीला देवी शामिल थे।
इस मौके पर भाजपा के जिला प्रभारी राजा वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष गौरव आर्य, भाजपा के विधायक सदर हरिशंकर माहौर व वीरेंद्र सिंह राणा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय, मुरसान ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय के अलावा काफी समर्थक मौजूद नहीं थे। इस दौरान लोगों ने सीमा उपाध्याय को बुके देकर स्वागत किया। सीमा उपाध्याय ने जिला पंचायत सदस्यों व अन्य समर्थकों को बधाई दी। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
24 में से 9 सदस्य नहीं पहुंचे शपथ ग्रहण समारोह में, भाजपा विरोधी खेमे में हैं शामिल
शपथ लेने के लिए सीमा उपाध्याय के साथ 14 सदस्य ही कलेक्ट्रेट सभागार पहुंचे। नौ सदस्य शपथ लेने के लिए नहीं पहुंचे। यह सभी भाजपा विरोधी खेमे में शामिल हैं। सोमवार को रालोद ने कलेक्ट्रेट में धरना देकर प्रदर्शन भी किया था और वहां रालोद के वरिष्ठ नेता व जिला पंचायत सदस्य प्रदीप चौधरी सहित कई सदस्य शामिल हुए लेकिन यह लोग शपथ लेने के लिए नहीं आए।
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सीमा उपाध्याय ने रालोद नेता प्रदीप चौधरी की पत्नी शशि चौधरी को दो वोट से हराया था। सीमा को 13 व शशि को 11 वोट मिले थे। इस सिलसिले में रालोद नेता व जिला पंचायत सदस्य प्रदीप चौधरी ने आरोप लगाया है कि विकास भवन में शपथ ग्रहण कार्यक्रम होने की जानकारी उन्हें दी गई थी लेकिन जब वह विकास भवन पहुंचे तो वहां कुछ था ही नहीं। प्रशासन जिला पंचायत के चुनाव से लेकर अब तक अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है।