इस कॉलेज में सन 1993 में सरकार की ओर से व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया गया और इस योजना के तहत ही कॉलेज को पेट्रोल व गैस से चलने वाला जेनरेटर उपलब्ध कराया था। 2008 में कॉलेज में कम्प्यूटर शिक्षा सत्र चलना प्रारम्भ हुआ था। अब वह खराब पड़ा हुआ है। उसे ठीक ही नहीं कराया गया।
हमारे कॉलेज में केवल दो घंटे के लिए जेनरेटर चलाया जाता है, बाकी पूरे दिन गर्मी में ही पढ़ना पड़ता है। पढ़ाने वाले अध्यापक की नजर बचाकर हम लोग कापी से जब कभी हवा करके समय निकालते हैं।-नितिन पचौरी, कक्षा 12
गर्मी में मेरे साथ मेरे साथ पढ़ने वाले अन्य विद्यार्थियों का तो हाल ही बुरा है। गर्मी सुबह से ही पड़ना शुरू होती है लेकिन हमारे कक्षा में लगे पंखे कभी दस बजे तो कभी 11 बजे से पहले चलना शुरू नहीं होते ।-विकास कुमार, कक्षा 11
हमारे कॉलेज में पढ़ाई तो अच्छी होती है परन्तु गर्मी के कारण हम लोग पढ़ नहीं पाते। पंखे दस बजे से चलते है और पांचवे घंटे में फिर बंद हो जाते है। गर्मी में हाथ के पंखे अथवा कॉपी से हवा करने में एकाग्रता भंग होती है।-कुमारी उन्नति, कक्षा 10
हमारी कक्षा में कम से कम 65 से लेकर 70 विद्यार्थी पढ़ते हैं गर्मी के कारण काफी हालत पतली हो जाती है ,हमारी कोई सुनता भी नहीं है।-यतेंद्र कुमार, कक्षा 9
विद्यालय का बिजली कनेक्शन सन 2013 से कटा हुआ है। बच्चों से पंखा शुल्क एक रुपया निर्धारित है । जेनरेटर चलाने में 500 रुपये का डीजल मुश्किल से दो दिन चल पाता है।-सूरजपाल सिंह, प्रधानाचार्य, एमएल इण्टर कॉलेज।
एमएल इण्टर कॉलेज का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस मामले की पूरी जांच पड़ताल करवा कर ही कुछ बता सकता हूं।-अमित कुमार अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग
विद्युत विभाग के साथ बिजली कनेक्शन काटने को लेकर स्कूल और विद्युत विभाग के बीच न्यायालय में मामला चल रहा है। इस कारण बिजली का कनेक्शन नहीं है। मैंने प्रधानाचार्य को दूसरे कनेक्शन के लिए बोला है। इसके साथ ही कॉलेज में जेनरेटर सुविधा उपलब्ध है। बीच में वह जेनरेटर दो दिन के लिए खराब हो गया था, अब वह ठीक हो गया है।-संतोष गुप्ता, प्रबंधक, एमएल इंटर कॉलेज सहपऊ।