फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मध्यम वर्ग आहत, किसानों को राहत

Thu, 01 Feb 2018 11:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
विज्ञापन
विसाबर में घुंघरू तैयार करते कारीगर। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
जीएसटी के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली के पहले बजट से हाथरवासियों को खासी उम्मीद थी, लेकिन इस बजट से किसानों को छोड़कर बाकी सभी को निराशा हाथ लगी है। जीएसटी के बाद करदाताओं की अच्छी-खासी संख्या बढ़ने के बावजूद बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विज्ञापन


हालांकि सभी तरह के वेतनभोगी कर्मियों को जरूर ने विशेष टैक्स रियायत बढ़ाकर राहत दी है। इससे मध्यम वर्गीय लोगों को झटका लगा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का आम बजट हाथरस के उद्योग-व्यापार को इस बार भी मायूस कर गया। वहीं आम बजट के साथ आए रेल बजट में यात्री किराया और माल भाडे़ पर कोई घोषणा नहीं हुई। 

हाथरस के हींग, रंग-गुलाल, अचार-मुरब्बा, दाल, रेडीमेड गारमेंट्स, मेटल हेंडीक्राफ्ट, गलीचा, हैंडलूम, मसाला उद्योग के अलावा पुरदिलनगर के प्रख्यात मूंगा-मोती, बिसावर के घुंघरू, हसायन के इत्र और चूड़ी उद्योग, सासनी के कांच और फाउंड्री उद्योग को इस बार भी मायूसी हाथ लगी है। हाथरस के मशहूर मिठाई, बूरा-बताशा जैसे प्रमुख कारोबारों के लिए भी कोई घोषणा इस बजट में नहीं हुई है। इन उद्योगों की बेहतरी का कोई भी फॉर्मूला जेटली के बजट से नहीं निकला।
विज्ञापन


हालांकि किसानों के लिए सभी उपजों के समर्थन मूल्य के ऐलान और तीन साल में 70 लाख नौकरियां निकाले जाने की घोषणा से बेरोजगारों को उम्मीदों के पंख जरूर लगे हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण बीमा योजना और आलू, टमाटर, प्याज के लिए 500 करोड़ के फंड के ऐलान से गरीबों और किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। सेस में एक फीसदी की वृद्धि और कस्टम ड्यूटी बढ़ने से भी आम लोगों की जेब ढीली होगी। हालांकि पेट्रोल, डीजल की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है लेकिन इससे ज्यादा राहत मिलती नजर नहीं आ रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें