हींग की गुणवत्ता की जांच के लिए अभी तक हाथरस में परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना नहीं हो सकी है, जबकि स्वीकृति मिलने के बाद हींग कारोबारियों ने अपने हिस्से की राशि के चेक भी दे दिए थे। जमीन के चयन की भी बात थी, लेकिन अब पता नहीं कि योजना कहां लंबित है।-मनोज अग्रवाल, पूर्व सचिव, हींग एसोसिएशन, हाथरस।
जिले में हींग परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना के लिए सभी कारोबारी पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। कुल दो करोड़ रुपये से इसकी स्थापना होनी थी। कारोबारी अपने हिस्से का 20 लाख रुपया तत्काल खर्च करने को तैयार हैं। प्रयोगशाला भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए बननी चाहिए।-पंकज अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, हींग एसोसिएशन, हाथरस।
पैदावार करने वाले देश व शहरों के नाम पर हींग के नाम
जिले में विदेशों से आने वाली हींग के नाम उन शहरों के नाम पर रखे गए हैं, जहां उसकी पैदावार होती है। जैसे अफगानिस्तान के मपार क्षेत्र की हींग को मपारी, पीनक की हींग को पीनकसीर, उज्बेकिस्तान की हींग को उज्बैकी, ताजिकिस्तान की हींग को तेजाकी व ईरान की हींग को हड्डा हींग नाम दिया गया है। इसके अलावा हीरा, हींगड़ा, किरमिस, चरास, नई जमीन, गलमीन, सियावड़ी व सीएच आदि कई प्रकार की हींग हाथरस आती है।