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हाथरस सत्संग हादसा: भगदड़ मचते ही भाग गए सेवादार-आयोजक, छोटी जगह में बनाया गया था पंडाल

Fri, 07 Mar 2025 02:03 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

जब भगदड़ मची और लोगों के मरने की सूचना पंडाल में गूंजी तो सभी सेवादार और आयोजक वहां से निकल भागे। मुख्य आयोजक मधुकर भी अपने साथियों के साथ गायब हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश हाथरस में भी की लेकिन, पता नहीं चला।
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हाथरस साकार हरि सत्संग में सेवादार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पिछले वर्ष दो जुलाई को बाबा साकार विश्व हरि के सत्संग के बाद मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। सत्संग की सभी व्यवस्थाओं को संभाल लेने का दावा करने वाले आयोजक और सेवादार भगदड़ मचने के साथ ही भाग गए थे। किसी ने घायलों की मदद तक नहीं की। अगर इन लोगों ने घायलों को समय से अस्पताल पहुंचा दिया होता तो कइयों की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस ने जो चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी उसमें भी इस बात का उल्लेख किया था।

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सिकंदराराऊ के फुलरई-मुगलगढ़ी में 2 जुलाई 2024 को हुए सत्संग में 3500 सेवादारों की ड्यूटी लगाई गई थी। मुख्य आयोजक न्यू काॅलोनी दमदपुरा सिकंदराराऊ निवासी देवप्रकाश मधुकर ने एसडीएम को सत्संग की अनुमति के लिए जो पत्र दिया था उसमें भी इस बात का जिक्र किया था। आयोजक मंडल में भी 12-15 लोग शामिल थे। दोपहर करीब तीन बजे भोले बाबा का जब सत्संग खत्म हुआ तो कुछ देर बाद ही यहां भगदड़ मच गई। भीड़ हाईवे की तरफ जा रही थी और सेवादार उन्हें डंडे के बल पर रोकने की कोशिश कर रहे थे।

जब भगदड़ मची और लोगों के मरने की सूचना पंडाल में गूंजी तो सभी सेवादार और आयोजक वहां से निकल भागे। मुख्य आयोजक मधुकर भी अपने साथियों के साथ गायब हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश हाथरस में भी की लेकिन, पता नहीं चला। उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख का इनाम भी घोषित किया था। पुलिस ने पांच जुलाई को उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इस मामले में आयोजक और सेवादार मिलाकर 11 लोग गिरफ्तार करके जेल भेजे थे। बाद में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।

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चार्जशीट के मुताबिक आयोजनकर्ता एवं सेवादारों ने व्यवस्था बनाने में कोई सहयोग नहीं किया। आयोजनकर्ताओं ने कार्यक्रम में एकत्रित होने वाली भीड़ की संख्या को छिपाकर अत्यधिक लोगों को बुलाया और कार्यक्रम स्थल पर यातायात नियंत्रण के लिए अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया। आयोजक घायलों की मदद किए बिना वहां से भाग गए।

छोटी जगह में बनाया था पंडाल, संकरा था आने-जाने का मार्ग
चार्जशीट में यह बात भी सामने आई है कि आयोजकों एवं सेवादारों ने सत्संग के लिए जो पंडाल बनाया था, वह छोटा और कम जगह में था। श्रद्धालुओं के आने-जाने का रास्ता भी संकरा बनाया गया था। आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से जिस हिसाब से भीड़ बुलाई गई थी, उस हिसाब से न तो रास्ता व पंडाल बढ़ाया गया और न ही अन्य इंतजाम किए गए।
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