हाथरस। वित्त मंत्री अरुण जेटली का आम बजट हाथरस के उद्योग-व्यापार को इस बार भी मायूस कर गया। टैक्सों के मकड़जाल से मुक्ति पाने के लिए जिस एकसूत्री कर प्रणाली की उद्यमी व व्यापारियों को आस थी, वह इस बार भी अधूरी रह गई। उम्मीद के मुताबिक न तो गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को इस साल ही हरी झंडी मिल पाई और न हीं एक सूत्री कर प्रणाली का दूसरा विकल्प उद्योग-व्यापार जगत को दिया, जबकि उद्यमी और व्यापारियों की दलील थी कि एक सूत्री कर प्रणाली ही जरूरी चीजों को सस्ता करने का रास्ता खोल सकती है। यही नहीं आयकर ढांचे में राहत की उम्मीद भी धरी रह गई। छोटे और मझोले कारोबारियों को आयकर में कोई राहत नहीं मिली, अलबत्ता रेडीमेड गारमेंट्स और सोने-डायमंड के गहने महंगे होने से इन कारोबारियों की चुनौती और बढ़ गई हैं। वैसे ही यह दोनों लघु उद्योग मंदी की मार से जूझ रहे हैं। हींग, रंग-गुलाल, अचार-मुरब्बा व दाल उद्योगों को तो इस बार भी मायूसी हाथ लगी है। इन उद्योगों की बेहतरी का कोई भी फॉर्मूला जेटली के बजट से नहीं निकला।
शहर के उद्योगों के टर्न ओवर पर एक नजर
अचार-मुरब्बा उद्योग का टर्न ओवर-20 से 25 करोड़ रुपये का सालाना टर्न ओवर है -15 कुल पंजीकृत अचार-मुरब्बे की फैक्ट्रियां हैं शहर में-12 करीब गैर पंजीकृत फैक्ट्रियां भी चल रही हैं यहां
दाल उद्योग एक नजर में-60 छोटी-बड़ी दाल मिल हैं शहर में-1,000 क्ंिवटल प्रतिदिन है दालों का उत्पादन-200 करोड़ रुपये करीब सालाना टर्न ओवर
मैटल कारोबार एक नजर में-125 करीब पंजीकृत मैटल यूनिटें हैं शहर में-100 से ज्यादा गैर पंजीकृत यूनिटें भी चल रही हैं-20 से 25 लाख रुपये प्रति वर्ष एक यूनिट का टर्न ओवर-50 से 55 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष सभी यूनिटों का कारोबार
हींग कारोबार एक नजर में-50 बड़ी हींग निर्माता फैक्ट्रियां हैं हाथरस में-100 छोटी फैक्ट्रियों से भी होता है हींग का कारोबार-22 करोड़ रूपये सालाना का है टर्न ओवर
रंग गुलाल इंडस्ट्री का टर्न ओवर-16 से ज्यादा रंग-गुलाल के कारखाने शहर में-30 करोड़ रुपये करीब सालाना टर्न ओवर कारोबार का
रेडीमेड गारमेंट्स इंडस्ट्री का टर्न ओवर-2,090 गारमेंट्स इकाइयां हैं शहर व गांवों में मिलाकर-12,000 लाख रुपये सालाना टर्न ओवर कारोबार का-150 लाख रुपये की आमदनी एक्सपोर्ट से
हाथरस से मिलने वाले टैक्स पर एक नजर-109.70 करोड़ रुपये तक कुल टैक्स देते हैं हाथरस वाले-84.74 करोड़ रुपये सालाना का वाणिज्य कर देता है हाथरस-3.50 करोड़ रुपये मासिक कर वसूलता है वाणिज्य कर विभाग-20 से 25 करोड़ रुपये सालाना का आयकर भी -02 करोड़ रुपये हर महीने मिलता है आयकर- 1.5 करोड़ रुपये सालाना सर्विस टैक्स
बोले उद्यमीहींग पर वर्तमान में 29 फीसदी एक्साइज ड्यूटी है। इसमें कमी की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने इस पर गौर नहीं किया है, जबकि हींग का इस्तेमाल औषधी के रूप में होता है और आयुर्वेदिक मेडिसन में भी इसका खासा उपयोग है। -राकेश बंसल, हींग निर्माता
बजट उद्योगपतियों और विदेशी निवेशकों के लिए है। सामान्य देशवासियों के लिए इसमें कुछ नहीं है। कृषि आधारित उद्योगों में 100 फीसदी एफडीआई का फैसला देसी उद्योगों के लिए घातक होगा। निवेश बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया। लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ भी नहीं है।-प्रदीप गोयल, दाल उद्यमीमसाला और फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बजट से कोई राहत नहीं है। कर मुक्त आय की सीमा कम से कम तीन लाख रुपये होनी चाहिए थी। 0.5 फीसदी कृषि सेवा कर बढ़ाकर करदाताओं पर बोझ बढ़ाया गया है।-विजय वार्ष्णेय, मसाला उद्यमी
बजट अच्छा है। सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। रोजगार बढ़ाने वाला है। 0.5 फीसदी जो सर्विस टैक्स बढ़ाया है, उससे स्टार्ट अप इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।-कपिल अग्रवाल, उद्यमी
पिछले तीन साल से रेडीमेड गारमेंट्स बाजार मंदी से जूझ रहा है, लेकिन इस पर ड्यूटी बढ़ाने का फैसला इस लघु उद्योग के लिए घातक होगा। करीब 20 फीसदी तक कारोबार गिरेगा। सरकार को लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने वाले कदम उठाने चाहिए थे।-सुनील अग्रवाल, रेडीमेड गारमेंट निर्माता
रेडीमेड गारमेंट्स महंगा होने से कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा। वैसे ही तीन साल में काम बहुत कम रह गया है। महंगाई को देखते हुए आयकर की सीमा भी बढ़ानी चाहिए थी।-सत्यनारायण गर्ग, रेडीमेड निर्माता
जानकारों की रायबजट से पहले टैक्सेशन में राहत का बहुत शोर मचा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। महंगाई के दौर में करमुक्त आय की सीमा बढ़ना जरूरी थी, लेकिन इस पर गौर नहीं किया। धारा 80 सी में कोई छूट नहीं है, जबकि 5 लाख तक की आय वालों को टैक्स में तीन हजार की मामूली छूट दी गई है।गिरधर गोपाल, चार्टड एकाउंटेंट
करमुक्त आय की लिमिट कम से कम तीन लाख होनी चाहिए थी। महंगाई को देखते हुए यह जरूरी भी था। जो भी टैक्स रियायतें दी गई हैं, उनका फायदा ज्यादा कारोबारियों को नहीं मिलेगा। बजट निराशाजनक ही कहा जाएगा।मनोज मित्तल, कर अधिवक्ता
बड़े कारोबारियों को बजट में कोई राहत नहीं है। पांच लाख तक की आमदनी वालों को तीन हजार रुपये की छूट के नाम पर करदाताओं को धोखा दिया गया है। धारा 80 सी में छूट मिलना भी जरूरी थी।रामअवतार अग्रवाल, कर अधिवक्ता
सर्राफ भी मायूसवैसे ही किसान की बर्बादी से सर्राफा बाजार मंदा चल रहा था। अब सोना महंगा होने से कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा। -शैलेंद्र वार्ष्णेय, सर्राफा कारोबारी
बजट आम जनता के हित में नहीं है। सोने-चांदी और महंगे हो गए। सर्राफा कारोबार के और बुरे दिन आने वाले हैं। आम लोग भी जेवर खरीदने में हिचकेंगे।-मोहनलाल अग्रवाल, सर्राफा कारोबारी
दिव्यांगजन बोलेदिव्यांगों के लिए सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। उम्मीद थी कि केंद्र सरकार उनके कल्याण के लिए कोई अहम घोषणा करेगी।-यश वार्ष्णेय, रुई की मंडी
दिव्यांगों के लिए कोई भी घोषणा नहीं करना सरकार की बड़ी भूल है। केवल दिव्यांगों का नाम परिवर्तन करने से ही उनका भला नहीं होने वाला।-नवीन अरोड़ा, दिव्यांगजन एसोसिएशन के अध्यक्ष
रीयल एस्टेट की राय---रीयल एस्टेट सेक्टर के लिए बजट बेहद अच्छा है। छोटे घर खरीदने वालों को जो टैक्स में छूट मिली है, उससे खरीदारों के साथ कारोबारियों को भी फायदा मिलेगा। कम लागत वाले प्रोजेक्टों को नई जान मिलेगी।-कृष्णा दीक्षित, रीयल एस्टेट कारोबारी
कृषि में एफडीआई का फायदा किसानों का होगा। किसानों की आमदनी बढ़ेगी तो रीयल एस्टेट को भी फायदा मिलेगा। पहली बार मकान खरीदने वालों को छूट सराहनीय है।-मनोज यादव, कारोबारी
बोले व्यापारीमहंगाई कम करने को कोई कदम नहीं उठाया। आयकर छूट सीमा भी नहीं बढ़ाई गई। बेहद निराशाजनक बजट है।-अरुण माहेश्वरी, व्यापारी
बजट उम्मीद के विपरीत रहा है। सर्विस टैक्स बढ़ाया गया है, जिससे महंगाई को और हवा मिलेगी। मध्य वर्ग पर बोझ और बढ़ेगा।-राजीव वार्ष्णेय, ट्रांसपोर्टर
आम लोगों के लिए बजट निराशाजनक है। ऊपर से कृषि में विदेश निवेश बढ़ाकर छोटे व्यापार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।-प्रदीप कुमार, किराना व्यापारी
शिक्षक भी मायूस--पूरी तरह अमीरों का बजट है। आम आदमी के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं सोचा। पूंजीपतियों के लिए दिल खोल दिया है।-दिलीप आमौरिया, प्रधानाचार्य
शिक्षा जगत के लिए निराशाजनक बजट है। कोई ऐसी घोषणा नहीं है, जिससे शिक्षा सस्ती हो और गरीब परिवारों को राहत मिले।-सुरेशचंद्र शर्मा, शिक्षक
किसान उवाच कृषि आधारित उद्योगों में 100 फीसदी एफडीआई से किसानों को फायदा मिलेगा, लेकिन सिंचाई और खाद-बीज सस्ता करने पर कोई बात नहीं हुई।-अतर सिंह, भीम नगरिया
किसानों के लिए सरकार ने कुछ नहीं सोचा। आलू निर्यात के लिए भी कोई घोषणा नहीं हुई, जबकि हर साल आलू खराब होता है।-कुंवरपाल सिंह, किसान
गृहणियों का दर्दमहंगाई सबसे बड़ी समस्या है। सरकार ने इसे कम करने का वादा भी किया था, लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ।-मनीषा वार्ष्णेय
न रसोई गैस और न हीं खाने-पीने की चीजों को सस्ता करने पर ध्यान दिया गया। महंगाई की मार फिर परेशान करेगी।-सरिता जैन
महिला कल्याण के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया, जबकि महिलाओं को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन निराशा मिली है।-रजनी आंधीवाल
छात्र बोलेछात्रों के लिए सरकार ने कुछ नहीं सोचा। उच्च और व्यवसायिक शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाना चाहिए था।-मिहीर वार्ष्णेय
गरीब और मध्य वर्ग के छात्रों के लिए व्यवसायिक शिक्षा सपना बन गई है। इनके बारे में सरकार ने कुछ नहीं किया।-शुभम सारस्वत