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गृह-जल कर के बिल देख सर्दी में भी छूटा पसीना

Tue, 10 Jan 2017 11:39 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
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tax evasion
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नगर पालिका ने 36 साल बाद गृहकर और जलकर में इजाफा तो कर दिया, लेकिन टैक्स बढ़ाने के नाम पर पूरी तरह मनमानी का खेल खेला जा रहा है। टैक्स की आड़ में पालिका प्रशासन जनता की जेब हल्की करने की कोशिश कर रहा है। करदाताओं को नगर पालिका प्रशासन मनमाने ढंग से टैक्स के नोटिस बनाकर भेज रहा हैं। 
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नगर पालिका द्वारा एक साथ 50 गुना अधिक टैक्स बढ़ाकर बिल भेजे दिए गए हैं। अब करदाता भारी-भरकम रकम के नोटिस लेकर इधर से उधर भटक रहे हैं, लेकिन कहीं से उन्हें यह जवाब नहीं मिल रहा कि आखिर पालिका ने टैक्स बढ़ाने का आधार क्या रखा है। टैक्स की दरें कितनी है और कितने क्षेत्र के भवन पर कितना टैक्स बनता है।

ऐसे कई सवाल इन-दिनों शहरवासियों के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। वहीं नगर पालिका प्रशासन भी करदाताओं को संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहा है। जैसे-जैसे लोगों के पास टैक्स के नोटिस पहुंच रहे हैं,  लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। नगर पालिका क्षेत्र में 36 साल बाद कराए गए नए सर्वे के बाद करदाताओं की संख्या 16 हजार से बढ़कर 32 हजार से अधिक हो गई है। नगर पालिका द्वारा धीरे-धीरे इन सभी करदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। 
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करदाताओं का कहना है कि पहले गृहकर एक साल का 200 से 250 रुपये का बिल आ रहा था, लेकिन इस बार नौ हजार से लेकर 12 हजार तक के बिल आए हैं। मकान 100 वर्ग गज का हो या 50 वर्ग गज का, सभी पर एक समान कर की दर लगाई गई हैं।

नगर पालिका टैक्स वसूली में मनमानी का खेल खेल रही है। पालिका के अधिकारी भी कर निर्धारण के संबंध में करदाताओं के सामने स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे। करदाता बिल लेकर घूम रहे हैं और बार-बार नगर पालिका के चक्कर भी लगा रहे हैं। पालिका अधिकारियों द्वारा संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने के कारण अब करदाता न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं। 

कर निर्धारण किस दर से किया गया है, कोई अधिकारी नहीं बता रहा। 50 गज का मकान हो या 100 वर्ग गज का, सभी को एक दर से टैक्स की दर लगाकर बिल भेजे गए हैं। यह नगर पालिका प्रशासन की तानाशाही है और हम इसके लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। 
राजेंद्र वार्ष्णेय, जामा मस्जिद चौराहा

-नगर पालिका प्रशासन ने सर्वे के बाद कर निर्धारण किस हिसाब से किया है। यह कोई बताने वाला ही नहीं है। नगरपालिका में भी सुनवाई नहीं हो रही। 
-रामपाल वर्मा, बीएच ऑयल मिल 

-जो टैक्स बिल सालाना का 150 से 250 रुपये का आता था वह बिल अब कई-कई गुना बढ़ाकर सात से नौ हजार तक भेजे गए हैं। नगर पालिका की तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 
-रामशंकर खंडेलवाल, नयागंज

-टैक्स निर्धारण के बाद यदि किसी को लग रहा है कि बिल ज्यादा आया तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। जिन्होंने पिछला कई माह से बकाया जमा नहीं कराया है उन पर बिल अधिक पहुंच गए होंगे। आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद ही वसूली कराई जाएगी। बेवजह लोगों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। 
- डौली माहौर, चेयरमैन 

वर्ष 1982 से शहर में कर निर्धारण नहीं हुआ था। इतने वर्षों में मकानों की कीमत काफी बढ़ गई। अगर किसी को कर के नए बिलों की धनराशि पर कोई आपत्ति है तो वह विधिवत रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराएं, जिनका नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा।
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-गुलशन सूरी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
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