ऊंचा गांव में तीन दिवसीय आर्य महा सम्मेलन में कुरीति निवारण, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, अवतारवाद जैसे तमाम कुचक्रों से निकलकर वैदिक संस्कृति की दोबारा स्थापना करने के लिए वक्ताओं ने विचार रखे।
वेद मंदिर अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश महाराज ने कहा कि राष्ट्र निर्माण तभी संभव हो सकेगा, जब हम स्वयं का निर्माण करेंगे। हम अपना निर्माण तभी कर सकते हैं, जब हम ईश्वर को सर्वज्ञ मानते हुए उस पर अटूट विश्वास करेंगे।
डॉ. अर्चना प्रिय आर्य व वंदना प्रिय आर्य ने कहा कि वंश कभी बेटा, बेटियों से नहीं चला करते हैं। वंश हमेशा चरित्र से चलता है। मेरे देश की माताओं तुम्हें दुनिया देख रही है। तुम्हारे ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
तुम्हें हर घर को स्वर्ग और हर आंगन को फुलवारी बनाना है। आचार्य डॉ. देव शर्मा ने यज्ञ महिमा पर प्रकाश डाला। रामनिवास आर्य व उदयवीर सिंह आर्य ने भजनों के माध्यम से कुरीतियों को त्यागकर वैदिक धर्म के मार्ग पर चलने की बात कही।
आचार्य चंद्र देव शास्त्री ने कहा कि हमें यदि भारत का दोबारा वैभव लौटाना है तो सत्य सनातन संस्कृति का आश्रय लेना पड़ेगा। संचालन आचार्य सत्यप्रिय आर्य ने किया। पतंजलि योग समिति के ऋषि कुमार द्वारा योगाभ्यास कराया गया।
सम्मेलन में आर्य समाज के प्रधान लखन सिंह आर्य, जयपाल सिंह, रनवीर सिंह, विवेक प्रिय आर्य, डॉ. कपिल प्रताप सिंह, डॉ. अशोक कुंतल, प्रियव्रत ओम, रनवीर सिंह प्रधान, विपिन आर्य, अरविंद आर्य, प्रमोद आर्य, रामप्रकाश आर्य, ब्रजमोहन सिंह, महीपाल सिंह, हरिओम, ओमवीर प्रधान, कालीचरन चौधरी, रामभरोसी प्रधान, प्यारे लाल, राजवीर सिंह, रतन सिंह आर्य, वीरी सिंह, महेश सिंह सहित काफी लोग शामिल थे।