जिलेभर में संक्रामक रोगों के प्रकोप को देखते हुए विश्वकर्मा जयंती की छुट्टी के दिन जिले में सभी सरकारी अस्पताल खोले गए। अस्पतालों में भारी संख्या में तीमारदारों के साथ आए मरीजों का उपचार कर उन्हें दवाएं दी गईं। इधर, प्राइवेट अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीजों की लाइन लगी रही।
विश्वकर्मा जयंती पर प्रदेश सरकार के सभी सरकारी विभागों में अवकाश था। इनमें स्वास्थ्य विभाग भी शामिल था, लेकिन सीएमओ ने जिले में संक्रामक रोगों के बढ़ रहे प्रकोप को देखते हुए शनिवार की छुट्टी के दिन भी अस्पताल खोले जाने का फरमान शुक्रवार की देर रात जारी कर दिया। सभी सीएचसी, पीएचसी प्रभारियों को उनके मोबाइल पर कॉल व मैसेज के माध्यम से अस्पताल खोले जाने की सूचना दी गई।
आदेश के बाद शनिवार को ग्रामीण व देहाती क्षेत्रों में सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का उपचार किया गया। इन अस्पतालों में भारी संख्या में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। सादाबाद के स्वास्थय केंद्र पर 800 से 900 मरीज काउंट किए गए। स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने वाले मरीजों में सबसे अधिक बुखार के रोगी थे। सीएमओ डॉ. रामवीर सिंह ने बताया कि संक्रामक रोगों के प्रकोप को देखते हुए शनिवार को भी सभी सीएचसी पीएचसी खुलवाए गए थे।
जिले में शुक्रवार की रात फिर एक और मौत बुखार से हो गई। अबकी बार बुखार का शिकार एक पांच वर्षीय मासूम छात्र बना। आगरा में उपचार होने के बाद भी इस मासूम की जिंदगी न बच सकी।
जिले में बुखार जानलेवा होता जा रहा है। बीते दिनों में आधा दर्जन से अधिक मौतें बुखार की वजह से हो चुकी हैं। सादाबाद क्षेत्र के गांव बरामई में मुकेश कुमार का पांच साल का बेटे अंशू को 10 दिन पहले बुखार आया था। पहले तो उसका स्थानीय स्तर पर उपचार कराया गया, लेकिन जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो परिजनों ने उसे आगरा के एक निजी हॉस्पीटल में भर्ती करा दिया। यहां भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
मुकेश की मानें तो बुखार के साथ चिकित्सकों ने उसकी आंतों में भी इन्फे क्शन बताया था। शनिवार को आगरा में उपचार के दौरान ही अंशू की मौत हो गई। परिजन अंशू के शव को गांव ले आए। अंशू की मौत पर पूरा गांव गमगीन था। इधर, सादाबाद सीएचसी प्रभारी डॉ. दानवीर सिंह ने बताया कि उन्हें बुखार से मौत की जानकारी नहीं है, लेकिन रविवार को वह गांव में टीम भेजेंगे और बुखार के रोगियों की जांच कराएंगे।