न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
उत्तर प्रदेश सतर्कता अनुष्ठान द्वारा नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा के विरुद्ध जांच की जा रही है। नगर पालिकाध्यक्ष की संपत्तियों बारे में अनुष्ठान ने एडीएम से कई बिंदुओं पर सूचना मांगी है। इसमें मुख्य रूप से वर्ष 2003 से वर्ष 2021 से बीच आशीष शर्मा द्वारा क्रय की गई संपत्तियों को लेकर विवरण मांगा है। अनुष्ठान के एसपी ने इसे लेकर एडीएम को पत्र भेजा है। हालांकि एडीएम का कहना है कि अभी तक उनके संज्ञान में ऐसी जानकारी नहीं है।
उत्तर प्रदेश सतर्कता अनुष्ठान द्वारा नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा के विरुद्ध जांच की जा रही है। शिकायतों के आधार पर शासन के निर्देश पर यह जांच की जा रही है। अब सतर्कता अनुष्ठान ने कई बिंदुओं पर एडीएम से जानकारी मांगी है। इसमें पूछा गया है कि क्या आशीष शर्मा के विरुद्ध स्टांप एक्ट से संबंधित कोई जांच और कार्रवाई चल रही है। यदि चल रही है तो उसका विवरण उपलब्ध करा दें। भूमाफिया चिह्नीकरण की कोई जांच या कार्रवाई हुई है या नहीं।
यदि हुई है तो उसका भी विवरण कराने को कहा गया है। वर्ष 2016-17 में नगर पालिका के सीवेज फॉर्म पर व्यावयायिक कांपलेक्स के टेंडर को लेकर शिकायत का विवरण और यदि कोई जांच या कार्रवाई हुई है तो उसका भी ब्योरा मांगा गया है। सीडीओ ऑफिस (निकुंज मोहन) व उसके जुड़ी जमीन के क्रय में किसी तरह की अनियमितता को लेकर हुई जांच या कार्रवाई, एलआईसी की सरकारी जमीन मौजा गढ़ी खंदारी के क्रय के संबंध में अनियमितता को लेकर किसी भी तरह की जांच या कार्रवाई आदि का विवरण मांगा गया है। अनुष्ठान के एसपी ने यह विवरण इस सिलसिले में जांच कर रहे निरीक्षक को उपलब्ध कराने को कहा है। इस सिलसिले में एडीएम बसंत अग्रवाल का कहना है कि उनके संज्ञान में अभी तक इस तरह का कोई पत्र नहीं है। संवाद
मेरे खिलाफ पूर्व सांसद राजेश दिवाकर, पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय व ऐसे राजनेता जांच करा रहे हैं, जिनका चुनाव में टिकट कट गया है। यह लोग पूर्व में भी मेरे खिलाफ इसी तरह की जांच करा चुके हैं। तब भी मुझे क्लीन चिट मिली। मैंने आज तक कोई भी संपत्ति अवैध रूप से अर्जित नहीं की। सब कुछ अपनी लगन और मेहनत से हासिल किया है। जनता में मेरी बढ़ती लोकप्रियता देखकर मेरे विरोधी मेरी शिकायतें करते रहते हैं। मैंने आज तक कोई गलत काम नहीं किया। विरोधियों की कोई भी चाल मुझे समाजसेवा करने से नहीं रोक सकती।
-आशीष शर्मा, नगर पालिकाध्यक्ष, हाथरस