संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
बार-बार कहने के बाद भी कुछ विद्यालयाें के संचालक विभागीय आदेश की अनदेखी कर रहे हैं। जिले के 200 से अधिक विद्यालयों के संचालकों ने यूपी बोर्ड के ऐसे परीक्षार्थियों के फोटो वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए हैं, जिनके फोटो अस्पष्ट हैं। दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी अपलोड नहीं किए गए हैं।
ऐसे परीक्षार्थियों के प्रवेशपत्र तभी अपलोड होंगे, जब इस कमी को दूर किया जाएगा। अब ऐसे विद्यालयों के संचालकों को मान्यता प्रत्याहरण की चेतावनी देते हुए सात मार्च तक इसे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
यूपी बोर्ड की वर्ष 2022 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में पंजीकृत परीक्षार्थियों के डाटा को देखने के बाद यह बात सामने आई है कि बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के फोटो विद्यालयों द्वारा अपलोड नहीं कराए गए हैं। कई परीक्षार्थियों के ऐसे फोटो अपलोड कराए गए हैं, जो अस्पष्ट और धूमिल हैं। इससे परिषदीय परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों के शामिल होने की संभावना हो सकती है।
ऐसी संभावनाओं पर अंकुश लगाने के लिए इस प्रकार के परीक्षार्थियों को चिन्हित कर उनकी फोटो परिषद की वेबसाइट 222.ह्वश्चद्वह्यश्च.द्गस्रह्व.द्बठ्ठ पर 17 फरवरी 2022 से 28 फरवरी 2022 तक अपलोड करने के निए निर्देश दिए गए थे, लेकिन अस्पष्ट/धूमिल परीक्षार्थियों के शुद्ध फोटो अभी तक नहीं किए गए हैं। यह परिषद के निर्देशों की अवहेलना है। परीक्षा की शुचिता को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा है कि प्रधानाचार्य द्वारा विद्यालय में अध्ययनरत जिन दिव्यांग परीक्षार्थियों की सूचना परिषद की वेबसाइट पर अपलोड कराई गई है, उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र अपलोड नहीं कराए गए हैं।
डीआईओएस ऋतु गोयल ने बताया कि यदि विद्यालय संचालकों द्वारा परीक्षार्थियों के साफ-सुथरे फोटो और दिव्यांग परीक्षार्थियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्र सात मार्च तक परिषद की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए जाते तो इन परीक्षार्थियों का प्रवेश पत्र प्रिंट नहीं कराया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य उत्तरदायी होंगे।
परिषदीय निर्देशों की अवहेलना को ध्यान में रखते हुए ऐसे विद्यालयों को काली सूची में डालकर उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए संबंधित विद्यालय प्रधानाचार्य स्वयं जिम्मेदार होंगे।