न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
इस विधानसभा चुनाव में दल बदलकर चुनाव लड़ने वालों की दाल नहीं लगी। जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कई बड़े नेता चुनाव हार गए। ऐसे में जनता ने यह भी दिखा दिया कि उसे दल बदलने वाले नेता पसंद नहीं है।
पिछले ढाई दशक से बसपा से जुड़े पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा ने निलंबित कर दिया था। इस बार विधानसभा चुनाव से पहले रामवीर ने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने रामवीर को टिकट भी दे दिया। रामवीर ने सादाबाद से भाजपा से चुनाव लड़ा, लेकिन कड़े मुकाबले में वह हार गए। रामवीर हमेशा बसपा से चुनाव जीते और इस बार बसपा छोड़ना उनके लिए फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ। इसी तरह पिछली बार वर्ष 2017 में हाथरस सदर सीट से बसपा से बृजमोहन राही चुनाव लड़े थे।
तब वह दूसरे स्थान पर आए थे। इस बार जीत की आस में उन्होंने सपा का दामन थामा। सपा ने उन्हें चुनाव भी लड़ाया, लेकिन इस बार वह खिसककर तीसरे स्थान पर आ गए और चुनाव नहीं जीत सके। भाजपा नेता डॉ. अविन शर्मा ने भी खेमा बदला और बसपा में शामिल हो गए। बसपा ने उन्हें सादाबाद सीट से चुनाव लड़ाया। डॉ.अविन ने दमदारी से चुनाव लड़ा, लेकिन वह सादाबाद सीट पर तीसरे स्थान पर ही आए। कई और नेताओं को भी दल-बदल रास नहीं आया। संवाद