न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
परिवहन निगम के हाथरस डिपो के अधिकारी भले ही बचत की खातिर निजी पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सवाल उठने लगे हैं कि कहीं यह नई व्यवस्था भी वित्तीय गड़बड़ियों की भेंट न चढ़ जाए। बाहर से डीजल की खरीद-फरोख्त में खेल होने की पूरी आशंका रहेगी।
गौरतलब है कि पूर्व में हाथरस डिपो की कार्यशाला में करीब 60 बोतलों में डीजल भरा हुआ मिला था। यहा मामला मुख्यालय तक पहुंचा था। इस मामले में आला अफसरों ने खुद कार्यशाला में आकर मामले की जांच की थी। उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो कभी फर्जी टिकट कांड तो कभी डीजल की बोतलों के मामले को लेकर चर्चाओं में रहा है।
हालांकि डिपो के अधिकारी पैसे बचाने के लिए बाहर से डीजल लेने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर अधिकारियों के सामने निजी पंप से डीजल लेने के दौरान पारदर्शिता का ध्यान रखने की भी कड़ी चुनौती होगी। कार्यशाला में डीजल पंप पर ऑटोमेशन सिस्टम लगा हुआ था। प्राइवेट पंप से डीजल लेने के लिए अधिकारी भले ही कंप्यूटराइज्ड पर्ची के इस्तेमाल की बात कह रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि हीं खेल करने वाले मुलाजिम इसकी भी काट न निकाल लें।