हाथरस : यूक्रेन से एमबीबीएस कर रही छात्रा रिम्मी वहां के हालात बिगड़ने से पहले ही घर लौट आई। संवा?
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हसायन (हाथरस)
यूक्रेन में युद्ध जैसे हालात बनने पर चौदह फरवरी की सुबह मैसेज से सूचित कर कहा गया था कि जिन छात्र-छात्राओं को अपने देश व घर जाना हैं वह जाने के लिए स्वतंत्र है। उसके बाद मैंने अपनी मां से बातचीत की। मां ने टीवी चैनल देखने के बाद तत्काल टिकट करा दिया और मैं वापस आ गई। ये बातें पिछले महीने यूक्रेन से लौटी कस्बा अंडौली निवासी ममता की पुत्री रिम्मी ने बताई। रिम्मी यूक्रेन के चर्नीबिस्ती बुकोबियन स्टेट मेडिकल यूनीवर्सिटी में पढ़ाई कर रही है।
अंडौली मार्ग निवासी ममता की बेटी रिम्मी (19) ने बताया कि वह 16 फरवरी की फ्लाइट से इंडिया आ गई थी। रिम्मी ने बताया कि जब वह हवाई अड्डे पर फ्लाइट पकड़ने पहुंची तो वहां पता चला कि हवाई अड्डा बदल गया है। रिम्मी ने बताया कि हालत सामान्य होने पर भी उन्हें इधर-उधर पैदल भागदौड़ कर फ्लाइट पकड़नी पड़ी। रिम्मी व उसकी मां ने यूक्रेन में फंसे बच्चों को वापस लाने के लिए भारत सरकार का आभार जताया है। संवाद