न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
ताइवानी खरबूज किसानों को मालामाल कर रहा है। प्रति बीघा पांच हजार की लागत से इसकी खेती कर किसान 30-35 हजार रुपये कमा रहे हैं। इसका फल भी अन्य खरबूजों की अपेक्षा काफी बड़ा होता है। बाजार में इसके दाम आम खरबूजे की अपेक्षा तीन गुना ज्यादा होते हैं।
विकास खंड मुरसान के गांव नगला मोतीराय निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक श्यामसुंदर शर्मा बैंगलोर से इसकी बीज मंगवा कर खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसकी बीज 90 हजार रुपये प्रति किलो है। 4500 रुपये में 50 ग्राम बीज मंगाकर जनवरी में पौध के लिए बीज डाला था। फरवरी में रोपाई की थी। उन्होंने बताया कि ताइवानी खरबूज 10-12 दिनों तक ताजा रहता है। इसकी खेती मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। संवाद
ऐसे होती है पौधों की रोपाई
ताइवानी खरबूजे की फसल के लिए सबसे पहले बेड तैयार करके उसके ऊपर पॉलीथिन बिछाई जाती है। उसके बाद उसमें जगह-जगह छेद करके खरबूजे के पौधे रोपे जाते हैं। इस विधि के अपनाने से खरबूजे के फसल खराब नहीं होते।
45 दिन में आना शुरू हो जाता है फल
पौधे रोपने के 45 दिन बाद से फल आना शुरू हो जाता है, जबकि आमतौर पर देसी खरबूजा की बेल पर ढाई महीने बाद फल आना शुरू होता है। ताइवानी खरबूजे की खास बात यह भी है कि उसे कई दिनों तक रखा जा सकता है। ऊपरी परत हार्ड होने के कारण यह जल्दी खराब नहीं होता है। श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि वह जो भी खेती करते हैं, जैविक तरीके से ही करते हैं। फिर चाहे फसल में खाद देना हो या फिर फसल को रोग व कीट मुक्त रखना हो, सब कुछ जैविक होता है। यही कारण है कि शर्मा की आज क्षेत्र में अलग खेती करने के लिए पहचान है।
- मैं एक सेवानिवृत्त शिक्षक हूं। सेवानिवृत्ति के बाद से ही जैविक खेती कर रहा हूं। पॉली हाउस में जैविक पद्घति से शिमला मिर्च की खेती करता हूं। ताइवानी खरबूज को भी इसी आधार पर किया है। यह अलग बात है कि इसकी मंडी स्थानीय स्तर पर नहीं है, लेकिन आगरा, दिल्ली और दूसरे राज्य के बड़े शहरों में इसकी मांग बहुत है। - श्यामसुंदर शर्मा, किसान
- मैं बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हूं। अपनी ड्यूटी करने के बाद जो भी समय बचता है, उस समय में मैं अपने पिता की मदद जैविक विधि से खेती करने में करता हूं, मुझे जैविक विधि से खेती करना अच्छा लगता है। - अमित कुमार शर्मा।