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हाथरस : कुछ तो गड़बड़ है अस्थायी गोशालाओं के अंदर

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हाथरस : खंडहर पड़ी गोशाला। संवाद - फोटो : SASNI
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
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लाखों रुपये खर्च करके शासन द्वारा ग्राम पंचायतों में आवारा गोवंश से किसानों को छुटकारा दिलाने के लिए बनवाई गई अस्थायी गोशाला वर्तमान में खंडहर के रूप में नजर आती है। इन गोशालाओं में न तो कोई निर्माण कराया गया है और न हीं गोवंश के लिए चारे-पानी का इंतजाम किया गया है। नतीजा, गोवंश भूखे-प्यासे कमजोर हो रहे हैं। किसानों को भी आवारा गोवंश से छुटकारा नहीं मिला है।
इन गोशालाओं में चारे-पानी की बात तो दूर, कोई छायादार वृक्ष एवं धूप ताप से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। क्षेत्र में एकमात्र अस्थायी गोशाला पराग डेयरी परिसर में बनी है। जब कभी शासन के अधिकारी गोशाला के मुआयने की इच्छा जाहिर करते हैं तो प्रशासनिक अमला उन्हें पराग डेयरी की गोशाला पर लाकर खड़ा कर देता है। मनमानी और कमियों पर पर्दा डालने की इंतहा ये है कि यहां किसी सामाजिक संस्था के कार्यकर्ता, मीडिया और आम लोगों को भी प्रवेश नहीं करने दिया जाता। अगर प्रशासन की मंशा इन गोशालाओं को लेकर पाक-साफ है तो वह क्यों यहां किसी को प्रवेश करने से रोकता है। मतलब, गोशालाओं के अंदर कुछ तो गड़बड़ है।
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मैने गांव में भी सड़क के किनारे अस्थायी गोशाला बनवाई थी। यह आज खंडहर हो चुकी है। इसमें कोई गोवंश नहीं है। न चारे-पानी की व्यवस्था है। धूप से बचने के लिए न तो कोई छायादार वृक्ष हैं और न हीं टिन शेड लगवाए गए हैं। लाखों रुपये बर्बाद होने के बाद भी किसान को आवारा गोवंश से छुटकारा नहीं मिला है।
-कालीचरन पाठक निवासी नगला गढू
हमारे गांव के निकट समामई की सीमा पर एक अस्थायी गोशाला के निर्माण के लिए खुदाई की गई थी। फाटक भी चढ़ाया गया था, लेकिन गोशाला खंडहर में बदल गई है। यहां गोवंश के लिए चारे-पानी एवं छाया की कोई व्यवस्था नहीं है। गोवंश की बहुत दुर्दशा हो रही है।
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-प्रशांत पाठक निवासी रूदायन
अस्थायी गोशालाओं के नाम पर खुदाई कराकर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया गया है। इन गोशालाओं की कोई उपयोगिता नहीं है और न किसान की समस्या का हल हुआ है। आज भी आवारा गोवंश खेतों में भटकता रहता है। अगर गोशाला में पहुंच जाए तो वहां चारा-पानी नहीं मिल पाता।
-विशाल तिवारी निवासी रूदायन
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