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हाथरस : चुनावी दंगल के शोर में नारों का जोर

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गौरव भारद्वाज
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हाथरस। विधानसभा चुनाव के दंगल में इस बार नए-नए नारे सुनने को मिल रहे हैं। सभी पार्टियों के प्रत्याशी नए-नए नारों से लोगों को लुभाने और प्रतिद्वंद्वी पर कटाक्ष कर रहे हैं। सभी दलों के कार्यकर्ता और समर्थक चुनावी नारों के साथ दिन भर प्रचार प्रसार में जुटे हुए हैं। वहीं सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के पदाधिकारी वीडियो के माध्यम से प्रचार-प्रसार में जुटे हैं।
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कुछ दलों ने नए चुनावी नारे गढ़े हैं। जबकि कुछ पुराने नारों के जरिये माहौल बना रहे हैं। चुनावी नारे सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। राजनीतिक दल ऐसा प्रयास करते हैं कि ऐसा ही नारा गढ़ जाए जो अधिक से अधिक लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंचे और उन पर अपनी छाप छोड़ने में सफल हो। देखा गया है कि कई नारे आमजन के दिमाग में ऐसे बैठ जाते हैं कि चुनाव निपट जाए भी लेकिन नारे दिमाग से नहीं निकलते हैं। संवाद
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मौजूदा चुनाव में प्रमुख पार्टियों के नारे
भाजपा
सोच ईमानदार, काम दमदार, एक बार फिर भाजपा सरकार।
साइकिल रखो नुमाइश में, बाबा ही रहेंगे बाइस में, फिर ट्राई करना सत्ताइस में।
सौ में साठ हमारा है, चालीस में बंटवारा है, उसमें भी हमारा है।
कांग्रेस
लड़की हूं लड़ सकती हूं।
लड़ेगा बढ़ेगा जीतेगा यूपी।
बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए।
समाजवादी पार्टी
यूपी में ये जनादेश, आ रहे अखिलेश।
बाइस में बाइसिकल
नई हवा है, नई सपा है।
बड़ों का हाथ, युवाओं का साथ।
जनता सपा के साथ है, बाइस में बदलाव है।
बसपा
हर पोलिंग बूथ जिताना है, बीएसपी को सत्ता में लाना है।
दस मार्च सब साफ बहनजी है यूपी की आस।
भाईचारा बढ़ाना है बसपा को लाना है।
सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय।
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