न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पुरजोर कोशिश करने के बाद भी भाजपा विधायक हरीशंकर माहौर अपना टिकट नहीं बचा पाए। पार्टी के स्थानीय कुछ नेताओं से तनातनी उनकी टिकट कटने की मुख्य वजह बनी। पार्टी के कुछ मानक पर भी वह खरे नहीं उतर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1991 में भाजपा से टिकट पाकर सासनी सीट से विधायक चुने गए सदर विधायक हरीशंकर माहौर लगातार तीन बार भाजपा से ही विधायक चुने गए। पिछले वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें पार्टी ने टिकट दिया और वह काफी वोटों से जीते, लेकिन उसके बाद उन पर क्षेत्र में काम न कराने के आरोप लगने लगे। इसके अलावा शहर के एक जनप्रतिनिधि व पार्टी के ही कुछ पदाधिकारियोें से भी अंदरखाने उनकी तनातनी जगजाहिर हो गई। सूत्रों के मुताबिक भाजपा का जब अंदरूनी सर्वे हुआ तो भी सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट उनके पक्ष में नहीं आई।
हालांकि पंचायत चुनाव में जब सांसद की पुत्री की जगह विधायक माहौर की पुत्रवधू को पार्टी ने सासनी के ब्लॉक प्रमुख के लिए चयनित किया था। तभी से माना जा रहा था कि पार्टी विधायक को टिकट इस बार काट सकती है और उनके स्थान पर नए प्रत्याशी को ला सकती है। इसके चलते विधायक के पुत्रवधू को ब्लॉक प्रमुख बनाया जा रहा है। विधायक के विरोधी भी उनकी टिकट कटवाने के लिए काफी सक्रिय थे। विधायक ने काफी कोशिश की कि उनका टिकट न कटे और पार्टी उन्हें फिर से प्रत्याशी बना दे, लेकिन विधायक अपना टिकट नहीं बचा सके। संवाद
पार्टी की बदौलत मैं चार बार विधायक बना। क्या हमेशा विधायक बना रहूंगा। पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है। जिसे पार्टी ने टिकट दिया है, उसे पूरी दमदारी से चुनाव लड़ाया जाएगा। पार्टी का कर्मठ सिपाही हूं और हमेशा रहूंगा।
-हरीशंकर माहौर, विधायक सदर, हाथरस