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हाथरस : हसायन में 200 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर वाले गुलाब कारोबार को मदद की दरकार

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हाथरस : हसायन में गुलाब के फूल से अर्क निकालने का होता काम। संवाद - फोटो : HASAYAN
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मुकुल भारद्वाज
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हसायन (हाथरस)। दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना राजस्व देने वाला हसायन का गुलाब आधारित उद्योग उपेक्षा का शिकार है। कई बार क्षेत्र के व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस उद्योग को मदद के लिए गुहार भी लगाई है, लेकिन नतीजा सिफर है। अब मांग उठी है कि हाथरस के हींग और रेडीमेड गारमेंट्स की तर्ज पर यदि इस उद्योग को भी एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल कर दिया जाए तो गुलाब उद्योग की महक में इजाफा हो सकता है।
मार्च और जुलाई गुलाब के फूलों के पैदावार के लिए मुफीद हैं। गुलाब के अर्क से इत्र, गुलाब जल, गुलकंद व अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस उद्योग से हजारों की रोजी-रोटी चलती है। किसानों के लिए भी गुलाब नगदी फसल है। गुलाब से सीजन में देश भर से उद्यमी हसायन में डेरा जमाते हैं। किसानों से गुलाब खरीदकर उससे उत्पाद तैयार करते हैं। संवाद
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गुलाब उद्योग को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कई बार पत्राचार किया गया था मगर अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि व राजनीतिक दल की सरकार में इस उद्योग को कोई फायदा नहीं दिया गया है।
-बंटी सिंह सेंगर, इत्र कारोबारी
प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही एक जिला एक उत्पाद योजना में अगर गुलाब उद्योग को शामिल कर लिया जाए तो छोटे व्यापारियों के साथ किसानों को भी इसका लाभ मिल सकता है। उद्योग की तरक्की का रास्ता खुल सकता है।
-आदित्य अग्निहोत्री, इत्र व्यापारी
गुलाब आधारित उद्योग पर एक नजर
100 करीब फैक्टरियां हैं गुलाब उत्पाद बनाने की।
ढाई से तीन करोड़ रुपये एक फैक्टरी का सालाना टर्न ओवर।
20 से 25 मजदूर एक फैक्टरी में करते हैं काम।
प्रमुख समस्याएं
-गुलाब के फूल को सुरक्षित रखने के लिए चिलिंग प्लांट की जरूरत है। गुलाब का फूल जल्द मुरझा जाता है, जिससे किसान को अपना फूल कौड़ियों के भाव बेचना पड़ता है।
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-इत्र पकाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन की उपलब्धता नहीं हो पाती। अभी लकड़ी और उपलों का उपयोग होता है। इसकी जगह उद्यमी गैस की सुविधा चाहते हैं।
-सरकार से उद्योग के विस्तार के लिए अनुदान और प्रशिक्षित जनशक्ति के लिए प्रशिक्षण कार्य चलाने की मांग पुरानी है।
अभी तक हसायन के इत्र उद्योग को लेकर उद्योग बंधु की बैठक में कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अगर प्रस्ताव दिया जाता है तो उसे शासन तक पहुंचाकर इस उद्योग को ओडीओपी में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
-दुष्यंत कुमार, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र
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