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हाथरस : समस्याओं के 'दशानन' से जूझ रहे हाथरस के लोग

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हाथरस: ऐतिहासिक किला क्षेत्र में अतिक्रमण। संवाद - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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इस शहर व जिले में रावण रूपी कई समस्याएं विकराल होती जा रही हैं। हाथरस कभी औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध था, लेकिन आज यहां के लोग इस समस्याओं से जूझ रहे हैं। विजयदशमी पर शहर और देहात की इन दस समस्याओं का जिक्र हम कर रहे हैं, जिनका यहां के लोग अंत चाहते हैं।
जिले की लचर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत
इस जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। सरकारी अस्पतालों में न पर्याप्त चिकित्सक हैं और न संसाधन। इस समय बुखार से लोगों की मौत हो रही है। संक्रामक रोग हमेशा जिले में तांडव मचाते हैं, लेकिन लचर स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से इन पर काबू नहीं पाया जाता। कोरोना के दौरान भी यही स्थिति देखी गई। जिले के सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बन गए हैं। जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने की जरूरत है।
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अतिक्रमण और कब्जों ने बिगाड़ी शहर की सूरत
अवैध कब्जे और अतिक्रमण ने इस शहर की सूरत बिगाड़ दी है। शहर के पुरातन महत्व की भूमि पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। किला राजा दयाराम क्षेत्र इसका उदहारण है। शहर में पोखर कागजों में है। इन इलाकों में कॉलोनियां बन गई हैं। अतिक्रमण से बाजार संकुचित हो गए हैं। पुरातन महत्व का किला राजा दयाराम और मंदिर श्रीदाऊजी महाराज भी अवैध कब्जे की चपेट में है। अतिक्रमण व अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
गंदगी और जलभराव की समस्या से नहीं मिल रही लोगों को मुक्ति
जलभराव और गंदगी इस शहर की भीषण समस्या है। करीब पांच दशक पुराने सीवरेज सिस्टम के चलते आज शहर के कई इलाकों में गंदगी व जलभराव की स्थिति है। बारिश के समय स्थिति विकराल हो जाती है। इस समस्या का अंत हो तो शहरवासियों को काफी राहत मिलेगी।
आवारा पशुओं की वजह से होते हैं हादसे
आवारा पशु जैसे सांड़, बंदर कुत्ते, नीलगाय लोगों को लगातार जान ले रहे हैं। किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। छुट्टा घूमते इन पशुओं को पकड़ने के लिए नगर पालिका व नगर पंचायत द्वारा ठोस कदम उठाए जाए तो आए-दिन लोग चोटिल होने से बच सकते हैं। पशुओं के आतंक का खात्मा भी होना जरूरी है।
प्रदूषण बना हुआ है गंभीर समस्या
प्रदूषण शहर और जिले के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है, क्योंकि यहां कूड़ा नष्ट करने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। चिकित्सकीय अपशिष्ट को नष्ट करने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। लगातार दोहन की वजह से जल स्तर भी गिर रहा है। शहर और देहात में कई उद्योग प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। रावण रूपी इस समस्या का अंत हो तो यहां की आव-ओ-हवा शुद्ध हो जाएगी।
सड़कों के गड्ढे बने हैं परेशानी का सबब
जिले में काफी सड़कों का निर्माण कराया गया है, लेकिन बारिश से फिर इन सड़कों में गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों के कारण आए-दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। अमृत योजना के तहत भी सड़कों की खुदाई की गई, लेकिन पाइप लाइन डालने के बाद गड्ढे नहीं भरवाए गए। इनका दुरुस्तीकरण होने की जरूरत है।
अभी भी कई चौराहों पर है जाम का झाम
हालांकि शहर के तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज बनने से लोगों को जाम से निजात मिली, लेकिन शहर के मुरसान गेट, चामड़ गेट, जलेसर रोड, इगलास रोड अड्डा, बिजली कॉटन मिल फाटक के अलावा कई इलाकों में लोग जाम से जूझ रहे हैं, क्योंकि इन रास्तों से ही शहर के अंदर जाने का प्रवेश रास्ता है। इस जाम से भी लोगों को मुक्ति मिलने की जरूरत है।
जर्जर विद्युत तार दे रहे हादसों को न्योता
बिजली के जर्जर तार अक्सर जिले में हादसों को न्योता देते हैं। हाईटेंशन लाइन बिना गार्ड वायर के हैं। साथ ही घरों के ऊपर से लाइन गुजर रही हैं, इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता है कि यह तार कब टूटकर गिर जाएं। पूर्व में कई घटनाएं हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों का इस पर ध्यान नहीं है। समस्या बेहद गंभीर होती जा रही है। ऐसे में लोग चाहते हैं कि उन्हें इस समस्या से निजात मिले।
भूजल दोहन, खारा पानी भी जिले की अहम समस्या
भूजल दोहन भी इस जिले की भीषण समस्या हैं। भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसकी वजह यह भी है कि काफी लोगों ने अपने घरों के बाहर अवैध रूप से सबमर्सिबल लगा रखे हैं। इस पर भी सरकारी तंत्र का ध्यान नहीं है। इसी तरह जिले के काफी गांवों में खारा पानी मुख्य समस्या बना हुआ है। खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए लोगों को सिवाय आश्वासन के अभी तक कुछ नहीं मिला है।
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ट्रांसपोर्ट नगर की महसूस हो रही जरूरत
शहर में जिस मार्ग से भी आप निकलेंगे, वहां आपको सड़क पर गलत तरीके से खड़े ट्रक, मेटाडोर और केंटर आदि वाहन मिल जाएंगे। इसकी वजह से भी शहर में जाम लगा रहता है। फुटपाथ पर लोडिंग वाहन सड़क को घेरे खड़े रहते हैं। यहां के ट्रांसपोर्ट कारोबारी लंबे समय से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह मांग पूरी नहीं हो रही।
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