न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पिछले दिनों भाजपा के विधायकों के सपा में जाने के एपिसोड ने सिकंदराराऊ विधायक वीरेंद्र सिंह राना को फिर से भाजपा का सिकंदराराऊ से टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाई। सूत्रों की मानें तो एक साथ दोनों मौजूदा विधायकों का टिकट काटकर पार्टी नेतृत्व बहुत ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहता था। ऐसे में सिकंदराराऊ विधायक को फिर से पार्टी ने टिकट थमा दिया।
सिकंदराराऊ के भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह राना को पार्टी ने फिर से प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर कई दावेदार ताल ठोंक रहे थे, लेकिन पार्टी ने राना पर ही भरोसा किया। सूत्रों की मानें तो सदर विधायक हरीशंकर माहौर का टिकट काटने की योेजना पहले से ही तय थी। इस दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य सहित कई विधायकों ने भाजपा से बगावत कर दी। ऐसे में पार्टी आलाकमान ने राना का टिकट काटने का जोखिम नहीं लिया। पार्टी नेतृत्व यह नहीं चाहता था कि जिले की दोेनों सीटों में से किसी भी मौजूदा विधायक को फिर से टिकट न मिले।
इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी का डर भी पार्टी आलाकमान को था। सूत्रों की मानें तो राना की संगठन स्तर से कोई शिकायत भी नहीं थी। उनका यहां के पदाधिकारियों से भी तालमेल सही है। सिकंदराराऊ सीट से भाजपा ने हमेशा क्षत्रिय को ही प्रत्याशी बनाया है। सूत्रों की मानें तो कई ब्राह्मण चेहरे भी सिकंदराराऊ से जोर लगा रहे थे, लेकिन रामवीर उपाध्याय का टिकट सादाबाद से फाइनल होने के बाद पार्टी नेतृत्व यह नहीं चाहता था कि छोटे से जिले में दो ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में उतारे जाएं। ऐसे में जातिगण समीकरणों पर भी राना फिट बैठे और पार्टी ने उन्हें फिर से प्रत्याशी बना दिया। संवाद