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हाथरस : पंचायत चुनाव : भाजपा की सूची पर लगी टकटकी

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हाथरस : हाथरस ब्लॉक कार्यालय पर नामांकन पत्र खरीदने को लगी लाइन। - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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पंचायत चुनाव में इस बार जिला पंचायत के वार्डों में दिलचस्प मुकाबला होने के आसार हैं। सबकी नजर फिलहाल भाजपा के प्रत्याशियों की सूची पर लगी हैं। जिला नेतृृत्व यहां से प्रत्याशियों के नामों की सूची प्रदेश कार्यालय को भेज चुका है। पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी ऋतु उपाध्याय ने भी वार्ड नंबर 14 से भाजपा प्रत्याशी बनने के लिए आवेदन किया है।
पंचायत चुनाव में अब करीब दो सप्ताह का समय बचा है। ऐसे में राजनेता काफी सक्रिय हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के कारण इस पद के लिए इस बार दिलचस्प मुकाबला होने के आसार हैं। जिले में जिला पंचायत के कुल 24 वार्ड हैं। भाजपा के जिला नेतृत्व ने प्रदेश कार्यालय को हर वार्ड से तीन-तीन नामों की सूची भेजी है। इनमें एक-एक दावेदार को भाजपा हाईकमान अपना समर्थन देगी। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के परिवार के तीन सदस्य पहले ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इसमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय, उनकी पत्नी सरोज उपाध्याय व रामेश्वर उपाध्याय की पत्नी कल्पना उपाध्याय शामिल हैं।
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सबसे रोचक बात तो यह है कि रामेश्वर उपाध्याय की पत्नी कल्पना उपाध्याय भी वार्ड 14 से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं और लगातार जन संपर्क कर रही हैं। अब रामवीर के छोटे भाई व पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की पत्नी ऋतु उपाध्याय ने भी वार्ड नंबर 14 से ही भाजपा की प्रत्याशी बनने के लिए आवेदन किया है। हालांकि मुकुल उपाध्याय ने यह भी कहा है कि परिवार से एक ही सदस्य इस वार्ड से चुनाव लड़ेगा। वहीं रामवीर उपाध्याय पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि उनकी पत्नी या बेटा इस चुनाव में भाग नहीं लेगा। इधर, सबकी टकटकी अब भाजपा की अंतिम सूची पर लगी है
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प्रदेश कार्यालय का चक्कर लगा रहे दावेदार
हाथरस। सूत्रों की मानें तो भाजपा जिला इकाई ने कई नेताओं के नाम अपनी सूची में नहीं भेजे हैं। ऐसे में दावेदार प्रदेश नेतृत्व के पास पहुंच रहे हैं और वहां से अपनी जुगत बैठा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक प्रतिष्ठ परिवार के किसी सदस्य का नाम स्थानीय इकाई ने अपनी सूची में नहीं भेजा है। इसकी जानकारी होने के बाद इस परिवार के कुछ सदस्य, जोकि जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे हैं, वह भाजपा का समर्थन पाने के लिए प्रदेश स्तरीय नेताओं के पास जा रहे हैं।
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